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विश्व में घट रहा शराब का चलन: स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता का प्रभाव Politics Of Alcohol Decline

वैश्विक स्तर पर शराब के सेवन में उल्लेखनीय गिरावट देखी जा रही है। अमेरिका में गैलप सर्वेक्षण के अनुसार, 2025 में शराब पीने वालों का प्रतिशत 90 वर्षों में सबसे कम था, जबकि यूरोप में भी अधिकांश उपभोक्ता कम शराब पी रहे हैं या छोड़ रहे हैं। हालांकि भारत में बिक्री बढ़ रही है, प्रति व्यक्ति खपत पश्चिमी देशों से कम है और शहरी क्षेत्रों में बदलाव के संकेत दिख रहे हैं। इस बदलाव के मुख्य कारण हैं बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता, जहाँ लोग ‘वेलनेस’ को प्राथमिकता दे रहे हैं, और सोशल मीडिया के युग में बढ़ती सामाजिक निगरानी, जहाँ सार्वजनिक व्यवहार के वीडियो वायरल होने का डर लोगों को जिम्मेदार रहने के लिए प्रेरित कर रहा है, जिससे सामाजिक प्रतिष्ठा या नौकरी खोने का जोखिम कम हो।

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: क्या यह लोकतंत्रों में जन-विश्वास बहाल कर सकता है? Ai Rebuilds Public Trust

वर्तमान में लोकतांत्रिक सरकारों पर जनता का भरोसा ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर है, जबकि सिंगापुर और यूएई जैसी टेक्नोक्रेटिक सरकारें उच्च विश्वास का आनंद ले रही हैं। डॉ. सामी महरूम के कॉलम के अनुसार, जहाँ एक ओर एआई को गलत सूचना का वाहक माना जा रहा है, वहीं यह जनता का विश्वास पुनः स्थापित करने में भी सक्षम हो सकता है। पश्चिमी लोकतंत्रों में नीति-निर्माण अक्सर दक्षता और राजनीतिक व्यवहार्यता के बीच फंसा रहता है, जबकि सफल टेक्नोक्रेटिक मॉडल जनता की संतुष्टि को प्राथमिकता देते हैं। एआई बड़े डेटा का विश्लेषण कर, जनभावना और विशेषज्ञ राय को एकीकृत करके अधिक तर्कसंगत, पारदर्शी और जन-स्वीकार्य नीतियां बनाने में सरकारों की मदद कर सकता है। यह नीति-निर्माण को कुशल बनाकर और मिथ्या सूचनाओं पर अंकुश लगाकर लोकतंत्रों में जनता का भरोसा लौटाने की कुंजी बन सकता है।

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संसदीय गतिरोध: लोकतांत्रिक परम्पराओं का क्षरण और जवाबदेही का सवाल Parliamentary Gridlock Democracy Crisis

संसद में बजट सत्र के दौरान लगातार हंगामे और लोकतांत्रिक परंपराओं के क्षरण पर चिंता व्यक्त की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देने से रोका गया, जैसा कि 2004 में मनमोहन सिंह के साथ भी हुआ था। इस बार पीएम का प्रस्ताव के मतदान के समय अनुपस्थित रहना एक नया उदाहरण बना। सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस, दोनों ही संसद के सुचारु संचालन में रुचि नहीं दिखा रहे हैं, जिससे महत्वपूर्ण चर्चाएँ बाधित हो रही हैं। भाजपा को गतिरोध से असहज सवालों से बचने का मौका मिलता है, जबकि विपक्ष इसे जनता तक अपनी बात पहुँचाने का प्रभावी तरीका मानता है। संसदीय अवरोध की यह प्रवृत्ति पूर्व में भी रही है, जब विपक्ष में रहते हुए नेताओं ने इसे लोकतंत्र का हिस्सा बताया था।

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मातृत्व की उलझन: समाज को ‘कोख’ चाहिए, ‘स्त्री’ क्यों नहीं? राजनीति Women’s Identity Motherhood Politics

समाज में महिलाओं पर शादी के बाद संतानोत्पत्ति का भारी दबाव होता है, लेकिन जैसे ही गर्भावस्था वास्तविक और शारीरिक रूप से प्रकट होती है, समाज असहज हो जाता है। यह विरोधाभास अभिनेत्री सोनम कपूर की गर्भावस्था के दौरान की पोशाक को लेकर हुए विवाद से उजागर हुआ। समाज एक ओर माँ बनने की अपेक्षा रखता है, वहीं दूसरी ओर माँ बनने के बाद महिला से अपनी पहचान और इच्छाओं का त्याग करने की मांग करता है। मातृत्व को आदर्श माना जाता है, पर गर्भवती महिला की शारीरिक जरूरतों और आत्मसम्मान की अनदेखी की जाती है। समाज को ‘कोख’ चाहिए, ‘स्त्री’ नहीं। गर्भवती महिला को एक पूर्ण मनुष्य के रूप में स्वीकारने में समाज हिचकिचाता है।

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ईरान-अमेरिका टकराव: ओमान में परोक्ष वार्ता, लेकिन सैन्य तनाव चरम पर Iran Us Oman Talks Tension

मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। ओमान की राजधानी मस्कट में हुई परोक्ष वार्ता में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल सीधे बातचीत नहीं कर पाए, बल्कि ओमान ने मध्यस्थता की। वार्ता से पहले दोनों ओर से धमकी भरे बयान और सैन्य तैनाती ने माहौल को और गरम कर दिया था। ईरान ने अमेरिकी दल में सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को खुली चेतावनी दी, जबकि ईरान के भीतर सरकार विरोधी प्रदर्शनों का दौर चल रहा था। दोनों देशों के एजेंडे भी अलग थे: अमेरिका व्यापक मुद्दों पर चर्चा चाहता था, जबकि ईरान इसे केवल परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों तक सीमित रखना चाहता था, जिससे बातचीत की सफलता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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ट्रंप-मोदी के रिश्तों में गर्माहट: भारत-अमेरिका सहयोग के वैश्विक निहितार्थ और रण… Trump Modi India Us Relations

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच के रिश्ते, जो 2025 में व्यापारिक तनाव और भू-राजनीतिक मतभेदों के कारण ठंडे पड़ गए थे, अब फरवरी 2026 तक पुनः गर्मजोशी पकड़ रहे हैं। भारत और अमेरिका, दो प्रमुख लोकतंत्र, जटिल अंतर्राष्ट्रीय विरोधाभासों के बावजूद सहयोग के नए आयाम तलाश रहे हैं। हालांकि, भारत को अमेरिका-यूरोपीय संघ और रूस-चीन जैसे विभिन्न गुटों के बीच अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और गुटनिरपेक्ष संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना होगा। कूटनीतिक हलकों में अमेरिकी स्टैंड की निरंतरता और उसके ‘नियंत्रित’ करने के प्रयासों पर संदेह बना हुआ है, जबकि भारत ने अपनी मजबूत स्थिति का प्रदर्शन किया है। इस बढ़ती निकटता के वैश्विक निहितार्थ गहरे हैं।

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बदलते फैशन ट्रेंड्स और कार्यबल: ‘टूल-बेल्ट जनरेशन’ की बढ़ती पहचान Policy Impacts Workforce Fashion

यह लेख ‘टूल-बेल्ट जनरेशन’ नामक एक नए फैशन ट्रेंड पर प्रकाश डालता है, जिसकी शुरुआत एक व्यक्तिगत अनुभव से होती है जहाँ लेखक को एक मच्छरदानी वाली काउबॉय हैट मिलती है। यह ट्रेंड उन लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जो शारीरिक श्रम करते हैं और सुरक्षा व आराम देने वाले कार्यात्मक परिधानों को प्राथमिकता देते हैं। जेन-जी युवा अब पारंपरिक ग्रेजुएशन के बजाय मैकेनिक जैसे कौशल-आधारित व्यवसायों में बेहतर आय के अवसर देख रहे हैं, जिसके चलते वे लचीले और पेशेवर-अनुकूल कपड़ों का चुनाव कर रहे हैं। ‘ट्रेड्सपीपल’ की पहचान अब केवल वर्कशॉप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कार्यस्थल पर भी एक फैशनेबल स्टेटमेंट बन रही है। अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड भी इस वर्कवेयर विरासत को बढ़ावा दे रहे हैं, जो कार्यबल की बदलती आवश्यकताओं और आर्थिक पहचान का प्रतीक है।

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ओमान में परोक्ष वार्ता: ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव, खाड़ी में गहराते चिंता क… Oman Iran Us Gulf Tension

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच, ओमान की राजधानी मस्कट में ईरान और अमेरिका के बीच परोक्ष वार्ता संपन्न हुई। दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने सीधे संवाद करने के बजाय, ओमान की मध्यस्थता के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान किया। वार्ता से पूर्व तीखी बयानबाजी और सैन्य जमावड़े ने माहौल को और गरमा दिया था। ईरान ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में सैन्य अधिकारियों की उपस्थिति पर आपत्ति जताई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी सर्वोच्च नेता को खुलेआम चेतावनी दी थी, जबकि ईरान अपने भीतर सरकार विरोधी प्रदर्शनों और इंटरनेट प्रतिबंधों से जूझ रहा था। अमेरिका व्यापक मुद्दों पर चर्चा चाहता था, जबकि ईरान केवल परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को हटाने तक सीमित रहने पर अड़ा था, जो इस वार्ता की मुख्य चुनौती रही।

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ट्रंप और मोदी के संबंधों में फिर लौटी गरमाहट: वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका Trump Modi Us India Warms

ट्रंप और मोदी के बीच के संबंधों में लंबे समय बाद फिर से गर्मजोशी लौट रही है, जिससे भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय और वैश्विक सहयोग के नए आयाम खुल रहे हैं। 2025 में व्यापारिक टैरिफ, रूस के साथ भारत के संबंध और पाकिस्तान पर अमेरिकी रुख के कारण रिश्तों में कड़वाहट आ गई थी। हालांकि, अब फरवरी 2026 तक स्थिति में सुधार दिख रहा है। भारत के सामने G7 और BRICS जैसे blocs के बीच अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने की चुनौती है। भारत ने अपनी दृढ़ कूटनीति का परिचय देते हुए अमेरिका को यह स्पष्ट कर दिया है कि उसके पास द्विपक्षीय विकल्पों की कोई कमी नहीं है, जिससे उसके राष्ट्रीय हित सुरक्षित रहें।

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डेरोन एस्मोगलु का विश्लेषण: ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिका की दिशा और अधिनायकवाद … Acemoglu On Trump’s America

जाने-माने विश्लेषक डेरोन एस्मोगलु ने अमेरिकी राजनीति में ट्रम्प के नेतृत्व में अधिनायकवाद की ओर संभावित फिसलन पर चिंता जताई है। वे पूछते हैं कि यह ‘निर्णायक मोड़’ कब आएगा, और मिनियापोलिस में आईसीई द्वारा दो नागरिकों की कथित हत्या को एक संभावित संकेत मानते हैं। लेख सत्तावादी और लोकतांत्रिक सरकारों द्वारा बल प्रयोग के तरीकों में अंतर को उजागर करता है, जहाँ लोकतांत्रिक समाजों में आंतरिक जाँच और नागरिक प्रतिरोध मौजूद होते हैं। हालांकि, आईसीई के बढ़ते प्रभाव, ट्रम्प समर्थक कर्मियों की भर्ती और न्याय विभाग के समर्थन को लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा बताया गया है, जो अमेरिका के भविष्य पर सवाल उठाता है।

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