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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन का सफर और सामाजिक सुरक्षा

लेखक: admin · प्रकाशित:
राजनीतिSadhnaNEWS Explained

साधना न्यूज़ डेस्क2 मिनट में पढ़ें

एक नज़र में

  • ईपीएफओ नवंबर में अपने 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है।
  • वर्ष 2026 की शुरुआत तक संगठन का कोष 30 लाख करोड़ रुपये से अधिक था।
  • वर्ष 2025-26 में 8.31 करोड़ दावे निपटाए गए।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) वेतन से एक हिस्से को बचाकर भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का आधार तैयार करता है। नवंबर में यह संगठन अपने 75वें वर्ष में प्रवेश करने जा रहा है। इसकी शुरुआत 1 नवंबर 1952 को छह उद्योगों में अनिवार्य भविष्य निधि व्यवस्था के साथ हुई थी, जिसका उद्देश्य श्रमिकों को आर्थिक सहारा और सामाजिक सुरक्षा देना था।

वर्ष 2026 की शुरुआत तक इसके कुल खाते लगभग 34 करोड़ थे, जिनमें 8 करोड़ सक्रिय सदस्य शामिल थे और इसका कोष 30 लाख करोड़ रुपये से अधिक था। यूएएन, ऑटो-ट्रांसफर और केंद्रीकृत पेंशन भुगतान जैसी सुविधाओं से इसकी सेवाएं आसान हुई हैं। वर्ष 2024-25 में 6.02 करोड़ दावे निपटाए गए, जबकि 2025-26 में इनकी संख्या बढ़कर 8.31 करोड़ हो गई।

पीएफ की बचत बुढ़ापे का सहारा है और बीमारी या घर खरीदने जैसी जरूरतों में राहत देती है। हालांकि, बार-बार निकासी से जमा पूंजी घटती है। पेंशन के लिए आमतौर पर दस साल की पात्र सेवा जरूरी होती है और रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से भुगतान में देरी हो सकती है।

खबर का संदर्भ

यह लेख ईपीएफओ के इतिहास, उसके बढ़ते दायरे, दावों के निपटारे और श्रमिकों के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों का विश्लेषण करता है।

EXPLAINED

आपके सवाल, सीधे जवाब

01. ईपीएफओ की शुरुआत कब हुई थी?

ईपीएफओ की शुरुआत 1 नवंबर 1952 को हुई थी।

02. पेंशन के लिए आमतौर पर कितने साल की सेवा जरूरी है?

पेंशन के लिए आमतौर पर दस साल की पात्र सेवा जरूरी है।

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