एक नज़र में
- रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम के तहत प्रतिबंधों और शुल्कों में छूट दी गई है।
- इससे रूस से प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कच्चे तेल की आपूर्ति जारी रहने की उम्मीद है।
- कपड़ा, चमड़ा, रत्न और आभूषण जैसे रोजगार देने वाले क्षेत्रों को इसका लाभ मिलेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम के तहत प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों में छूट दिए जाने को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और निर्यातकों के लिए राहत भरा कदम बताया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, रूस से प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कच्चे तेल की निरंतर आपूर्ति से उत्पादन लागत को नियंत्रित करने, महंगाई कम करने और आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने में मदद मिलेगी।
फिक्की के महासचिव अनंत स्वरूप ने कहा कि इस अतिरिक्त शुल्क से छूट मिलने से अस्थायी राहत मिलती है और यह ऊर्जा सुरक्षा के लिए स्वागत योग्य है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी छूट में अल्प सूचना पर बदलाव किया जा सकता है या इसे वापस लिया जा सकता है, जिससे कारोबारियों को दीर्घकालिक नीतिगत निश्चितता नहीं मिलती।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि यह व्यावहारिक कदम भारत के निर्यात के समक्ष मौजूद एक बड़े जोखिम को टालता है। इससे कपड़ा, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण और इंजीनियरिंग उत्पाद जैसे अधिक रोजगार देने वाले क्षेत्रों को लाभ होगा और खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा।
खबर का संदर्भ
यह रिपोर्ट अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट के भारत के ऊर्जा क्षेत्र और निर्यात पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करती है, जिसमें उद्योग निकायों की प्रतिक्रियाएं शामिल हैं।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. किस अधिनियम के तहत प्रतिबंधों में छूट दी गई है?
रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम (एसआरआईए) के तहत छूट दी गई है।
02. इस छूट से किन क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है?
कपड़ा, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण और इंजीनियरिंग उत्पाद जैसे अधिक रोजगार देने वाले क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
