एक नज़र में
- सैटकॉम सेवाओं के लिए गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंजूरी जरूरी है.
- दूरसंचार विभाग सभी सैटकॉम कंपनियों को लाइसेंस और अस्थायी स्पेक्ट्रम दे चुका है.
- एलन मस्क के आरोपों पर भारतीय दूरसंचार कंपनियों ने प्रतिक्रिया नहीं दी है.
संचार राज्यमंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा है कि उपग्रह संचार सेवाओं से जुड़े सुरक्षा मामलों पर गृह मंत्रालय विचार कर रहा है। सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद ही कंपनियों को सेवाएं शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि दूरसंचार विभाग ने सभी सैटकॉम कंपनियों को लाइसेंस देने के साथ अस्थायी स्पेक्ट्रम भी आवंटित कर दिया है। यह मामला किसी एक कंपनी से जुड़ा हुआ नहीं है।
यह बयान अमेरिकी अरबपति एलन मस्क के उस आरोप के बाद आया है जिसमें उन्होंने कुछ कारोबारियों पर स्टारलिंक की सेवाओं को रोकने का आरोप लगाया था। मस्क ने मणिपुर में स्टारलिंक सेवाओं के इस्तेमाल के आरोपों को भी खारिज किया।
भारती एयरटेल, रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। एयरटेल के संस्थापक सुनील भारती मित्तल ने भी कहा कि उनकी कंपनी मंजूरी का इंतजार कर रही है।
खबर का संदर्भ
यह रिपोर्ट उपग्रह संचार (सैटकॉम) सेवाओं के भारत में संचालन से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया और संबंधित बयानों पर आधारित है।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. सैटकॉम सेवाओं को शुरू करने के लिए किसकी मंजूरी जरूरी है?
गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद ही सेवाएं शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।
