एक नज़र में
- भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत ठहराव के दौर में पहुंची।
- अमेरिका व्यापार असंतुलन को कम करना और अपने नुकसान की भरपाई करना चाहता है।
- शुल्क का मनमाना इस्तेमाल और हथियार के रूप में प्रयोग बढ़ रहा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के लिए बातचीत जारी है, लेकिन यह ऐसे ठहराव पर पहुंच गई है जहां से आगे और रियायतें देने की गुंजाइश सीमित है। उन्होंने यह बात म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में कही, हालांकि यह भी जोड़ा कि यदि आगे बढ़ने की कोई गुंजाइश निकलती है, तो दोनों पक्ष इस पर विचार करेंगे।
वित्त मंत्री ने बताया कि भारत के पक्ष में व्यापार असंतुलन का होना इस रिश्ते की एक विशेषता है और अमेरिका इस घाटे को कम करना तथा अपने नुकसान की भरपाई करना चाहता है। उन्होंने शुल्क के मनमाने इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा कि अब शुल्क का इस्तेमाल बातचीत के दायरे से बाहर जाकर एक हथियार के रूप में तेजी से हो रहा है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका और भारत एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन कोई समझौता तुरंत होने की संभावना नहीं है। इसके अलावा, प्रगति की समीक्षा के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही फोन पर बातचीत कर सकते हैं।
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते पर बात करते हुए सीतारमण ने इसे मदर ऑफ ऑल डील्स बताया और कहा कि राष्ट्रीय हितों को बनाए रखने के लिए समझौतों को ऐसे ढाला जा रहा है ताकि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल में टिका जा सके जहां विश्व व्यापार संगठन के नियमों का सम्मान नहीं बचा है।
खबर का संदर्भ
यह रिपोर्ट भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालती है। वित्त मंत्री के बयानों के माध्यम से वैश्विक व्यापार में आ रही बाधाओं और शुल्क के बढ़ते उपयोग को रेखांकित किया गया है।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत को लेकर वित्त मंत्री ने क्या कहा?
वित्त मंत्री ने कहा कि बातचीत ऐसे ठहराव पर पहुंच गई है जहां से आगे और रियायतें देने की गुंजाइश सीमित है।
