एक नज़र में
- लवलीना बोरगोहेन ने 75 किग्रा वर्ग के फाइनल में चीन की बाओ जियी को 5-0 से हराया।
- उन्होंने एशियाई खेलों में 12 साल बाद महिला मुक्केबाजी का देश के लिए स्वर्ण पदक जीता।
- एमसी मैरी कॉम के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज हैं।
भारतीय मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने एशियाई खेलों में 75 किग्रा वर्ग के फाइनल मुकाबले में चीन की बाओ जियी को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना ने इस जीत के साथ पिछले एशियाई खेलों के रजत पदक के रंग को स्वर्ण में बदल दिया।
इस शानदार जीत के साथ लवलीना एशियाई खेलों में मुक्केबाजी का स्वर्ण पदक जीतने वाली देश की दूसरी महिला मुक्केबाज बन गईं। उनसे पहले महान मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम ने 2014 के इंचियोन एशियाई खेलों में 51 किग्रा फ्लाइवेट वर्ग का स्वर्ण पदक अपने नाम किया था।
मुकाबले के दौरान लवलीना ने अपनी लंबाई का पूरा लाभ उठाया और अपनी प्रतिद्वंद्वी को दूरी पर रखा। मैच के शुरुआती दौर से ही कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जिसमें दोनों मुक्केबाजों ने एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी, लेकिन अंततः भारतीय मुक्केबाज ने सटीक पंचों के दम पर बाजी अपने नाम कर ली।
खबर का संदर्भ
लवलीना बोरगोहेन की यह उपलब्धि भारतीय महिला मुक्केबाजी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि उन्होंने महाद्वीपीय प्रतियोगिता में देश को 12 साल बाद महिला वर्ग का स्वर्ण पदक दिलाया है।
EXPLAINED
आपके सवाल, सीधे जवाब
01. लवलीना बोरगोहेन ने फाइनल में किस खिलाड़ी को हराया?
उन्होंने चीन की बाओ जियी को हराया।
02. लवलीना ने किस भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता?
उन्होंने 75 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।
