📅 10 अप्रैल 2026 | SadhnaNEWS Desk
🔑 मुख्य बातें
- ₹10,000 से अधिक के ऑनलाइन पेमेंट पर 1 घंटे का होल्ड, गलत ट्रांजैक्शन कैंसिल करने का मौका मिलेगा।
- सीनियर सिटीजंस के लिए ‘ट्रस्टेड पर्सन’ सुविधा, 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए सुरक्षा और सख्त होगी।
- डिजिटल पेमेंट बंद करने के लिए ‘किल स्विच’ का सुझाव, अकाउंट हैक होने पर एक क्लिक से पेमेंट सेवाएं बंद कर सकेंगे।
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब ₹10,000 से ज्यादा के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में एक घंटे की देरी हो सकती है। इस देरी का उद्देश्य ग्राहकों को गलत ट्रांजैक्शन को रोकने या कैंसिल करने का अवसर देना है। RBI का मानना है कि जालसाज अक्सर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर करवाते हैं, और यह देरी उस दबाव को कम करेगी।
वर्तमान में, अधिकांश डिजिटल ट्रांजैक्शन तुरंत हो जाते हैं, जिससे उपयोगकर्ताओं को सोचने या गलती सुधारने का समय नहीं मिलता। RBI के इस प्रस्ताव से डिजिटल भुगतान को और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। यह नियम बैंकों और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ परामर्श के बाद लागू किया जाएगा। RBI ने सीनियर सिटीजंस के लिए ‘ट्रस्टेड पर्सन’ सुविधा का भी प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए ₹50,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए एक ‘भरोसेमंद व्यक्ति’ की मंजूरी जरूरी हो सकती है।
इसके अतिरिक्त, RBI ने एक ‘किल स्विच’ का भी सुझाव दिया है। यदि किसी ग्राहक को लगता है कि उसका अकाउंट हैक हो गया है या कोई गलत ट्रांजैक्शन हो रहा है, तो वह एक क्लिक से अपनी सभी डिजिटल पेमेंट सेवाओं को तुरंत बंद कर सकेगा। यह सुविधा उपयोगकर्ताओं को तत्काल सुरक्षा प्रदान करेगी और धोखाधड़ी को रोकने में सहायक होगी। यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति या मर्चेंट को पैसे भेज रहे हैं, जिस पर आपको भरोसा है, तो आप उसे अपनी ‘व्हाइटलिस्ट’ में शामिल कर सकते हैं। व्हाइटलिस्टेड लोगों को पेमेंट करने पर यह 1 घंटे की देरी लागू नहीं होगी, जिससे नियमित लेन-देन में कोई बाधा नहीं आएगी।
पिछले साल, देश में डिजिटल धोखाधड़ी के कारण ₹22 हजार करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ था। RBI के अनुसार, ₹10 हजार से ऊपर के ट्रांजैक्शन कुल फ्रॉड केस का सिर्फ 45% हैं, लेकिन कुल फ्रॉड वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी 98.5% है। इसी को ध्यान में रखते हुए ₹10 हजार की लिमिट तय की गई है। यह नियम जल्द ही लागू हो सकता है, जिससे डिजिटल भुगतान प्रणाली और अधिक सुरक्षित हो जाएगी। इस कदम से उद्योग और वित्त क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है।
यह नया नियम शेयर बाजार और निवेश के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सुरक्षित डिजिटल लेनदेन से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा। इससे मार्केट में स्थिरता आएगी और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। RBI के इस कदम से न केवल व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं को लाभ होगा, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने में मदद करेगा। इस नियम के लागू होने से डिजिटल इंडिया के सपने को और बल मिलेगा और लोग अधिक सुरक्षित रूप से ऑनलाइन लेनदेन कर सकेंगे।
इस नियम का उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित बनाना है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि इससे आम लोगों को असुविधा न हो। व्हाइटलिस्ट सुविधा और किल स्विच जैसे विकल्प उपयोगकर्ताओं को नियंत्रण में रखने में मदद करेंगे। RBI को इस नियम को लागू करने से पहले सभी पहलुओं पर ध्यान देना होगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह प्रभावी और उपयोगकर्ता के अनुकूल हो।
भविष्य में, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नियम डिजिटल धोखाधड़ी को कम करने में कितना सफल होता है और क्या RBI को भविष्य में और भी सख्त कदम उठाने की आवश्यकता होगी। फिलहाल, यह नियम डिजिटल भुगतान को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
🔍 खबर का विश्लेषण
यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह डिजिटल धोखाधड़ी को कम करने और ऑनलाइन लेनदेन को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। RBI का यह कदम उपयोगकर्ताओं को धोखाधड़ी से बचाने और डिजिटल भुगतान प्रणाली में विश्वास बढ़ाने में मदद करेगा। इससे उद्योग, शेयर मार्केट और निवेश में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि सुरक्षित लेनदेन से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और मार्केट में स्थिरता आएगी। यह नियम डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने में भी सहायक होगा।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ ₹10,000 से अधिक के ऑनलाइन पेमेंट पर 1 घंटे की देरी क्यों होगी?
यह देरी ग्राहकों को गलत ट्रांजैक्शन को रोकने या कैंसिल करने का मौका देने के लिए है। RBI का मानना है कि जालसाज अक्सर जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर करवाते हैं, और यह देरी उस दबाव को कम करेगी।
❓ ‘ट्रस्टेड पर्सन’ सुविधा क्या है और यह किसके लिए है?
यह सुविधा 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए है। इसके तहत ₹50,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए एक ‘भरोसेमंद व्यक्ति’ की मंजूरी जरूरी हो सकती है।
❓ ‘किल स्विच’ क्या है और यह कैसे काम करता है?
‘किल स्विच’ एक ऐसी सुविधा है जिससे यदि किसी ग्राहक को लगता है कि उसका अकाउंट हैक हो गया है या कोई गलत ट्रांजैक्शन हो रहा है, तो वह एक क्लिक से अपनी सभी डिजिटल पेमेंट सेवाओं को तुरंत बंद कर सकेगा।
❓ ‘व्हाइटलिस्ट’ क्या है और यह कैसे उपयोगी है?
यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति या मर्चेंट को पैसे भेज रहे हैं जिस पर आपको भरोसा है, तो आप उसे अपनी ‘व्हाइटलिस्ट’ में शामिल कर सकते हैं। व्हाइटलिस्टेड लोगों को पेमेंट करने पर 1 घंटे की देरी लागू नहीं होगी।
❓ यह नियम कब तक लागू हो सकता है?
RBI फिलहाल बैंकों और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ परामर्श कर रहा है। यह नियम जल्द ही लागू हो सकता है, जिसके बाद डिजिटल भुगतान प्रणाली और अधिक सुरक्षित हो जाएगी।
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Source: Agency Inputs
| Published: 10 अप्रैल 2026
