📅 25 मार्च 2026 | SadhnaNEWS Desk
🔑 मुख्य बातें
- मेटा ने मेटावर्स पर काम कर रहे 10% कर्मचारियों की छंटनी की, वीआर हेडसेट का उपयोग भी बंद किया।
- एपल के महंगे हेडसेट और बाजार की बेरुखी ने मेटा के खेल को बिगाड़ा, डिज्नी ने भी पद खत्म किए।
- मेटा अब होराइजन वर्ल्ड्स को वीआर से हटाकर मोबाइल फोन पर ला रहा है, रणनीति में बड़ा बदलाव।
नई दिल्ली: फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग का मेटावर्स का सपना, जिसने एक समय में भविष्य की तकनीक के रूप में सुर्खियां बटोरी थीं, अब मुश्किलों में घिरता नजर आ रहा है। 2021 में कंपनी का नाम बदलकर ‘मेटा’ करने के बाद जुकरबर्ग ने एक ऐसी आभासी दुनिया की कल्पना की थी, जहां लोग अवतारों के रूप में रहेंगे, काम करेंगे और खेलेंगे। लेकिन, अरबों डॉलर के निवेश के बाद भी यह वर्चुअल दुनिया लोगों को आकर्षित करने में विफल रही है।
मेटा ने हाल ही में मेटावर्स प्रोजेक्ट पर काम कर रहे अपने 10 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। इसके साथ ही कंपनी ने यह भी घोषणा की है कि 15 जून से लोग वीआर हेडसेट के माध्यम से होराइजन वर्ल्ड्स जैसे इमर्सिव प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं कर पाएंगे। इस प्रोजेक्ट पर मेटा ने लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपए (80 बिलियन डॉलर) खर्च किए थे, लेकिन अब इसे समेटने की तैयारी है। जुकरबर्ग की यह महत्वाकांक्षी योजना अब टेक जगत की सबसे महंगी विफलताओं में से एक मानी जा रही है, क्योंकि कंपनी का ध्यान अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर केंद्रित हो गया है।
जुकरबर्ग ने 2014 में कंपनी ‘ऑक्युलस’ को लगभग 16,600 करोड़ रुपए में खरीदकर इस सफर की शुरुआत की थी। उन्हें उम्मीद थी कि वर्चुअल रियलिटी स्मार्टफोन की जगह ले लेगी। इसके लिए उन्होंने गेमिंग स्टूडियो खरीदे और डेवलपर्स पर करोड़ों रुपए खर्च किए। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान यह आइडिया क्रांतिकारी लग रहा था, लेकिन बाद में वास्तविकता इससे अलग निकली। मेटावर्स के शुरुआती वर्जन तकनीकी कमियों से भरे थे, जिसके कारण सोशल मीडिया पर इसका काफी मजाक भी उड़ाया गया।
सिर्फ मेटा ही नहीं, इस दौड़ में शामिल अन्य दिग्गज कंपनियों को भी निराशा हाथ लगी है। एपल ने 2024 में ‘एपल विजन प्रो’ लॉन्च किया, जिसकी कीमत लगभग 3 लाख रुपए थी, जो आम आदमी के बजट से बहुत दूर थी। विश्लेषकों का मानना है कि वीआर तकनीक को एक स्वतंत्र प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करना उम्मीद से कहीं ज्यादा कठिन और समय लेने वाला काम है। डिज्नी जैसी कंपनियों ने भी अपने ‘चीफ मेटावर्स ऑफिसर्स’ के पद खत्म कर दिए हैं।
मेटा अब अपने फ्लैगशिप ऐप होराइजन वर्ल्ड्स का रुख वीआर से हटाकर मोबाइल फोन की ओर कर रहा है, जो इस प्रोजेक्ट की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। यह दर्शाता है कि कंपनी अब अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर रही है और व्यापक दर्शकों तक पहुंचने के लिए नए रास्ते तलाश रही है। मेटावर्स के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि जुकरबर्ग का शुरुआती विजन फिलहाल धराशायी हो गया है।
मेटावर्स की विफलता कई कारकों का परिणाम है, जिसमें तकनीकी कमियां, उच्च लागत और आम जनता की उदासीनता शामिल हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मेटा एआई के क्षेत्र में कितनी सफलता हासिल कर पाती है और क्या मेटावर्स का विचार भविष्य में कभी फिर से उभर कर सामने आता है। फिलहाल, जुकरबर्ग का यह महंगा प्रयोग एक सबक है कि नवाचार के लिए जरूरी है कि वह वास्तविकता से जुड़ा हो और लोगों की जरूरतों को पूरा करे। बाजार और निवेश के बदलते रुख को समझना भी आवश्यक है।
🔍 खबर का विश्लेषण
यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि कैसे एक बड़ी कंपनी, जिसके पास अपार संसाधन हैं, भी एक नए तकनीकी क्षेत्र में विफल हो सकती है। मेटावर्स की विफलता तकनीक उद्योग के लिए एक चेतावनी है कि किसी भी नई तकनीक में निवेश करने से पहले बाजार और उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया को समझना कितना महत्वपूर्ण है। यह निवेशकों को भी सतर्क रहने और सोच-समझकर निवेश करने की सलाह देता है। शेयर मार्केट में अस्थिरता बनी रहती है, इसलिए सावधानी आवश्यक है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ मेटावर्स क्या है और यह क्यों विफल हुआ?
मेटावर्स एक आभासी दुनिया है जहां लोग अवतारों के रूप में बातचीत कर सकते हैं। यह तकनीकी कमियों, उच्च लागत और जनता की कम रुचि के कारण विफल रहा।
❓ मेटा ने मेटावर्स पर कितना पैसा खर्च किया?
मेटा ने मेटावर्स प्रोजेक्ट पर लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपए (80 बिलियन डॉलर) खर्च किए, जो अब डूब गए हैं।
❓ एपल विजन प्रो की कीमत क्या है और यह क्यों सफल नहीं हुआ?
एपल विजन प्रो की कीमत लगभग 3 लाख रुपए है, जो आम आदमी के बजट से बहुत दूर है, इसलिए यह सफल नहीं हो पाया।
❓ डिज्नी ने मेटावर्स के बारे में क्या फैसला लिया?
डिज्नी ने अपने ‘चीफ मेटावर्स ऑफिसर्स’ के पद को खत्म कर दिया है, जो मेटावर्स में उनकी रुचि में कमी को दर्शाता है।
❓ मेटा अब किस तकनीक पर ध्यान केंद्रित कर रहा है?
मेटा अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, क्योंकि मेटावर्स प्रोजेक्ट सफल नहीं हो पाया।
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Source: Agency Inputs
| Published: 25 मार्च 2026
