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गुवाहाटी: मयंक चक्रवर्ती बने भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर, रचा इतिहास

खेल
📅 15 मार्च 2026 | SadhnaNEWS Desk

गुवाहाटी: मयंक चक्रवर्ती बने भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर, रचा इतिहास - SadhnaNEWS Hindi News


🔑 मुख्य बातें

  • मयंक चक्रवर्ती पूर्वोत्तर भारत से ग्रैंडमास्टर बनने वाले पहले खिलाड़ी हैं, जिससे क्षेत्र में खुशी की लहर है।
  • 17 वर्षीय मयंक ने स्वीडन में ‘होटल स्टॉकहोम नॉर्थ’ टूर्नामेंट में स्वीडिश आईएम फिलिप लिंडग्रेन को हराकर यह मुकाम हासिल किया।
  • मयंक ने अंडर-11 वर्ग में भारत और एशिया में शीर्ष स्थान हासिल किया था, और 2021 में उनकी ईएलओ रेटिंग 1800 से बढ़कर 2200 हो गई थी।

गुवाहाटी: असम के युवा शतरंज खिलाड़ी मयंक चक्रवर्ती ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने अपना तीसरा और अंतिम ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल करते हुए भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव प्राप्त किया है। मयंक पूर्वोत्तर भारत से यह प्रतिष्ठित खिताब जीतने वाले पहले खिलाड़ी हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार और कोचों को गौरवान्वित किया है, बल्कि देश के अन्य युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरित किया है।

17 वर्षीय मयंक चक्रवर्ती ने यह उपलब्धि स्वीडन में ‘होटल स्टॉकहोम नॉर्थ बाय फर्स्ट होटल्स चेस टैलेंट्स टूर्नामेंट’ में हासिल की। उन्होंने टूर्नामेंट के आठवें दौर में स्वीडिश आईएम फिलिप लिंडग्रेन को हराकर यह मुकाम हासिल किया। इस जीत के साथ ही उन्होंने आवश्यक 6.5 अंक प्राप्त कर लिए, जिससे उनका ग्रैंडमास्टर नॉर्म पक्का हो गया। मयंक ने टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और अपने विरोधियों को कड़ी टक्कर दी।

मयंक चक्रवर्ती 2024 में इंटरनेशनल मास्टर बने थे। उन्होंने अंडर-11 वर्ग में भारत और एशिया में शीर्ष स्थान हासिल किया था। 2021 में उन्होंने यूरोप में कई टूर्नामेंटों में भाग लिया, जिससे उनकी ईएलओ रेटिंग 1800 से बढ़कर 2200 के करीब पहुंच गई। वह 2009 या उसके बाद जन्मे खिलाड़ियों की ईएलओ रैंकिंग में दुनिया के छठे नंबर के खिलाड़ी भी बन गए। मयंक की प्रतिभा और लगन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। उन्होंने कम उम्र में ही शतरंज की बारीकियां सीख ली थीं और लगातार अभ्यास करते रहे।

मयंक चक्रवर्ती की इस सफलता पर पूरे देश में खुशी का माहौल है। खेल जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें बधाई दी है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। मयंक की कहानी अन्य युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने साबित कर दिया है कि कड़ी मेहनत और लगन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। मयंक की इस उपलब्धि से भारत में शतरंज के खेल को और बढ़ावा मिलेगा।

मयंक चक्रवर्ती ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, कोचों और शुभचिंतकों को दिया है। उन्होंने कहा कि उनके समर्थन के बिना यह संभव नहीं था। मयंक ने भविष्य में और भी बेहतर प्रदर्शन करने का संकल्प लिया है और देश के लिए और भी कई खिताब जीतने का लक्ष्य रखा है। उनकी इस सफलता से यह भी साबित होता है कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने की जरूरत है। भारत सरकार और खेल मंत्रालय को चाहिए कि वे युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए और भी योजनाएं चलाएं।

मयंक चक्रवर्ती की इस उपलब्धि से पूर्वोत्तर भारत में खेल के प्रति रुचि और बढ़ेगी। यह क्षेत्र पहले से ही फुटबॉल और हॉकी जैसे खेलों में अपनी पहचान बना चुका है। अब शतरंज में भी इस क्षेत्र के युवा खिलाड़ी आगे बढ़ रहे हैं। मयंक की सफलता से अन्य युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी और वे शतरंज को करियर के रूप में चुनने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

मयंक चक्रवर्ती की इस ऐतिहासिक जीत से भारतीय शतरंज में एक नया अध्याय शुरू हुआ है। उनकी सफलता युवा पीढ़ी को प्रेरित करेगी और देश में शतरंज के खेल को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। हमें उम्मीद है कि मयंक भविष्य में भी इसी तरह शानदार प्रदर्शन करते रहेंगे और देश का नाम रोशन करते रहेंगे।

🔍 खबर का विश्लेषण

मयंक चक्रवर्ती की उपलब्धि भारतीय शतरंज के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है। यह न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिभा का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत में शतरंज के खेल का स्तर लगातार बढ़ रहा है। उनकी सफलता से अन्य युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी और वे भी इस खेल में अपना करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित होंगे। यह खबर खेल जगत में भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

❓ मयंक चक्रवर्ती कौन हैं?

मयंक चक्रवर्ती असम के गुवाहाटी के रहने वाले एक युवा शतरंज खिलाड़ी हैं। उन्होंने हाल ही में भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर बनकर इतिहास रचा है। वह पूर्वोत्तर भारत से यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले खिलाड़ी हैं।

❓ मयंक चक्रवर्ती ने ग्रैंडमास्टर का खिताब कैसे हासिल किया?

मयंक चक्रवर्ती ने स्वीडन में ‘होटल स्टॉकहोम नॉर्थ बाय फर्स्ट होटल्स चेस टैलेंट्स टूर्नामेंट’ में अपना तीसरा और अंतिम ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल किया। उन्होंने टूर्नामेंट के आठवें दौर में स्वीडिश आईएम फिलिप लिंडग्रेन को हराया और आवश्यक अंक प्राप्त किए।

❓ मयंक चक्रवर्ती की पिछली उपलब्धियां क्या हैं?

मयंक चक्रवर्ती 2024 में इंटरनेशनल मास्टर बने थे। उन्होंने अंडर-11 वर्ग में भारत और एशिया में शीर्ष स्थान हासिल किया था। 2021 में उन्होंने यूरोप में कई टूर्नामेंटों में भाग लिया, जिससे उनकी ईएलओ रेटिंग में सुधार हुआ।

❓ मयंक चक्रवर्ती की सफलता का महत्व क्या है?

मयंक चक्रवर्ती की सफलता भारतीय शतरंज के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है। यह दर्शाता है कि भारत में शतरंज के खेल का स्तर लगातार बढ़ रहा है। उनकी सफलता से अन्य युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी और वे भी इस खेल में अपना करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

❓ मयंक चक्रवर्ती भविष्य में क्या करने की योजना बना रहे हैं?

मयंक चक्रवर्ती ने भविष्य में और भी बेहतर प्रदर्शन करने का संकल्प लिया है और देश के लिए और भी कई खिताब जीतने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, कोचों और शुभचिंतकों को दिया है।

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Source: Agency Inputs
 |  Published: 15 मार्च 2026

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