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राज्यसभा में ईरान जंग पर हंगामा: जयशंकर का बयान, विपक्ष का वॉकआउट

राष्ट्रीय
📅 09 मार्च 2026 | SadhnaNEWS Desk

राज्यसभा में ईरान जंग पर हंगामा: जयशंकर का बयान, विपक्ष का वॉकआउट - SadhnaNEWS Hindi News


🔑 मुख्य बातें

  • राज्यसभा में ईरान जंग के मुद्दे पर विदेश मंत्री जयशंकर के बयान के दौरान विपक्ष का हंगामा और वॉकआउट।
  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मिडिल ईस्ट जंग का भारत पर असर और ऊर्जा संकट पर चर्चा की मांग की।
  • लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को हटाने की मांग पर विपक्ष के प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है।

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में सोमवार को राज्यसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर के अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग पर दिए गए बयान के दौरान भारी हंगामा हुआ। हंगामे के बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया। जयशंकर ने कहा कि भारत शांति के पक्ष में है और गल्फ में मौजूद भारतीयों को जनवरी में ही अलर्ट कर दिया गया था। इस घटना ने एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर देश के भीतर राजनीतिक मतभेदों को उजागर कर दिया है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में ईरान के नेतृत्व से संपर्क स्थापित करना मुश्किल है, लेकिन भारत लगातार शांति और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जनवरी में ही एडवाइजरी जारी कर दी थी। सरकार देश की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का भारत पर गंभीर असर पड़ सकता है, खासकर ऊर्जा संकट के मामले में। उन्होंने इस विषय पर सदन में तत्काल चर्चा कराने की मांग की। खड़गे ने कहा कि सरकार को देश को यह बताना चाहिए कि इस संकट से निपटने के लिए उसकी क्या योजना है।

वहीं, लोकसभा में आज स्पीकर ओम बिरला को हटाने की मांग पर विपक्ष के प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है। कांग्रेस समेत 118 सांसदों ने लोकसभा सचिवालय को स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सौंपा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही में निष्पक्षता नहीं बरत रहे हैं और विपक्ष को पर्याप्त मौका नहीं दे रहे हैं। इस मुद्दे पर भी सदन में भारी हंगामे के आसार हैं।

विदेश मंत्री जयशंकर ने जानकारी दी कि 67,000 नागरिक इंटरनेशनल बॉर्डर पार कर चुके हैं। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार स्थिति पर पूरी तरह से नजर बनाए हुए है और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने सभी से शांति बनाए रखने की अपील की। भारत सरकार इस मामले में सभी पक्षों से बातचीत करने के लिए तैयार है।

इस बीच, संसद की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है, जिससे महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और पारित होने में देरी हो रही है। सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनाने के प्रयास जारी हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। देश की सरकार शांति बनाए रखने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है।

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मुद्दे पर विपक्ष को कैसे शांत करती है और सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए क्या कदम उठाती है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी गरमागरम बहस होने की संभावना है। देश को इस मामले में सरकार के अगले कदम का इंतजार है।

🔍 खबर का विश्लेषण

यह घटनाक्रम भारत की विदेश नीति और आंतरिक राजनीति के बीच जटिल संबंधों को दर्शाता है। एक तरफ, सरकार अंतर्राष्ट्रीय मंच पर शांति की वकालत कर रही है, वहीं दूसरी तरफ, घरेलू स्तर पर उसे विपक्ष के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इस खबर का महत्व इस बात में है कि यह दिखाता है कि कैसे अंतर्राष्ट्रीय संकट भारत की घरेलू राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं और सरकार के लिए चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

❓ ईरान जंग पर राज्यसभा में क्या हुआ?

विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया और वॉकआउट कर दिया। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा।

❓ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने क्या मांग की?

मल्लिकार्जुन खड़गे ने मिडिल ईस्ट जंग का भारत पर असर और ऊर्जा संकट पर सदन में चर्चा कराने की मांग की, ताकि सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट कर सके।

❓ लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को हटाने की मांग क्यों की जा रही है?

विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही में निष्पक्षता नहीं बरत रहे हैं और विपक्ष को पर्याप्त मौका नहीं दे रहे हैं। इसलिए, उन्हें हटाने का प्रस्ताव लाया गया है।

❓ विदेश मंत्री जयशंकर ने गल्फ में मौजूद भारतीयों के बारे में क्या कहा?

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि गल्फ में मौजूद भारतीयों को जनवरी में ही अलर्ट कर दिया गया था और सरकार उनकी सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रही है।

❓ इस घटनाक्रम का भारत पर क्या असर हो सकता है?

इस घटनाक्रम से भारत की विदेश नीति और घरेलू राजनीति प्रभावित हो सकती है। अंतर्राष्ट्रीय संकटों का देश के भीतर राजनीतिक माहौल पर असर पड़ सकता है और सरकार के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

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Source: Agency Inputs
 |  Published: 09 मार्च 2026

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