📅 09 मार्च 2026 | SadhnaNEWS Desk
🔑 मुख्य बातें
- फाल्गुन पूर्णिमा 2026: 2 मार्च को करें व्रत, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण के कारण व्रत वर्जित।
- पंचांग के अनुसार 2 मार्च को शाम 05:56 बजे से पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ, चंद्र दर्शन शुभ फलदायी।
- होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों वाली होली 4 मार्च को मनाई जाएगी, जानें सही तिथि और महत्व।
नई दिल्ली: फाल्गुन पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसके अगले दिन होली का त्योहार मनाया जाता है। वर्ष 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति है, क्योंकि इस दौरान चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। शास्त्रों और पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि दो दिनों तक रहेगी, इसलिए सही तिथि का निर्धारण महत्वपूर्ण है।
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 05:56 बजे शुरू होगी और 3 मार्च 2026 को शाम 05:08 बजे समाप्त होगी। शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा का व्रत उस दिन रखना चाहिए जिस दिन सूर्यास्त के बाद पूर्णिमा तिथि में चंद्रमा दिखाई दे। चूंकि 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि चंद्रमा के उदय से पहले ही समाप्त हो रही है, इसलिए 2 मार्च को व्रत रखना शास्त्रसम्मत माना गया है। इस दिन चंद्र दर्शन करना भी शुभ फलदायी होगा।
वर्ष 2026 में 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लगने के कारण भी असमंजस की स्थिति है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, ग्रहण के दौरान सूतक काल मान्य होगा। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और किसी भी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान वर्जित होते हैं। इसलिए, विद्वानों ने 3 मार्च के बजाय 2 मार्च को ही धार्मिक अनुष्ठान करने की सलाह दी है। भारत देश में इस समय धार्मिक कार्यों को बहुत महत्व दिया जाता है।
तिथियों में बदलाव के कारण होलिका दहन और होली की तारीखों में भी परिवर्तन हुआ है। होलिका दहन 2 मार्च को किया जाएगा, क्योंकि पूर्णिमा तिथि इसी दिन शुरू हो रही है। रंगों वाली होली, जिसे धुलेंडी भी कहा जाता है, 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। प्रधानमंत्री ने भी देशवासियों को होली की शुभकामनाएं दी हैं।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत और त्योहार सही तिथि पर मनाए जाएं। 2 मार्च को व्रत रखकर और होलिका दहन करके आप शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं। 4 मार्च को रंगों के त्योहार होली को हर्षोल्लास के साथ मनाएं।
इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव भी रहेगा, इसलिए धार्मिक कार्यों को करते समय सावधानी बरतें। सूतक काल के नियमों का पालन करें और भगवान की आराधना में मन लगाएं। यह समय आध्यात्मिक चिंतन और मन की शुद्धि के लिए उत्तम है।
अंत में, फाल्गुन पूर्णिमा 2026 एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर है। सही तिथि और मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए व्रत और त्योहार मनाएं और जीवन में सुख-समृद्धि लाएं। राष्ट्रीय स्तर पर इस त्योहार को मनाने की तैयारियां ज़ोरों पर हैं।
🔍 खबर का विश्लेषण
यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह फाल्गुन पूर्णिमा के व्रत और होली की सही तिथि के बारे में जानकारी प्रदान करती है। चंद्र ग्रहण के कारण उत्पन्न भ्रम को दूर करते हुए, यह भक्तों को सही समय पर धार्मिक अनुष्ठान करने में मदद करती है। सही तिथि का ज्ञान धार्मिक कार्यों को विधिपूर्वक संपन्न करने के लिए आवश्यक है, जिससे शुभ फल प्राप्त होते हैं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ फाल्गुन पूर्णिमा 2026 कब है?
फाल्गुन पूर्णिमा 2026, 2 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन व्रत रखना शुभ होगा, क्योंकि 3 मार्च को चंद्र ग्रहण है।
❓ चंद्र ग्रहण का फाल्गुन पूर्णिमा पर क्या प्रभाव होगा?
चंद्र ग्रहण के कारण 3 मार्च को सूतक काल रहेगा, इसलिए इस दिन धार्मिक अनुष्ठान वर्जित होंगे। 2 मार्च को ही व्रत और पूजा करना उचित है।
❓ होलिका दहन 2026 कब है?
होलिका दहन 2 मार्च 2026 को किया जाएगा, क्योंकि पूर्णिमा तिथि इसी दिन शुरू हो रही है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
❓ रंगों वाली होली (धुलेंडी) कब मनाई जाएगी?
रंगों वाली होली, जिसे धुलेंडी भी कहा जाता है, 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। यह त्योहार प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है।
❓ फाल्गुन पूर्णिमा का क्या महत्व है?
फाल्गुन पूर्णिमा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह दिन भगवान विष्णु और चंद्रमा की पूजा के लिए समर्पित है, और इसे सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
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Source: Agency Inputs
| Published: 09 मार्च 2026
