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मथुरा: होली के रंग में डूबी कृष्ण नगरी, भक्ति और उल्लास का संगम

धर्म
📅 06 मार्च 2026 | SadhnaNEWS Desk

मथुरा: होली के रंग में डूबी कृष्ण नगरी, भक्ति और उल्लास का संगम - SadhnaNEWS Hindi News


🔑 मुख्य बातें

  • मथुरा में होली के रंगों में सराबोर हुए भक्त और स्थानीय लोग, दिखा पारंपरिक उत्साह।
  • बांके बिहारी मंदिर में होली का विशेष आयोजन, श्रद्धालुओं ने उड़ाया रंग और गुलाल।
  • गोवर्धन के बछगांव में ‘चप्पल’ होली का आयोजन, 150 साल पुरानी परंपरा का निर्वाह।

मथुरा, 6 मार्च 2026: कृष्ण की नगरी मथुरा बुधवार को होली के रंगों में सराबोर हो गई। भक्तों और स्थानीय लोगों ने पारंपरिक उत्साह और उमंग के साथ होली मनाई। पूरे शहर में रंगों की धूम मची रही और हर कोई कृष्ण भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। मथुरा में होली का विशेष महत्व है, जहाँ यह पर्व भगवान कृष्ण की लीलाओं का प्रतीक माना जाता है।

श्री बांके बिहारी मंदिर में सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने बताया कि मंदिर के बाहर होली खेली जा रही है, लेकिन गर्भगृह के अंदर होली का उत्सव होलिका दहन के दिन ही समाप्त हो जाता है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं ने जमकर रंग और गुलाल उड़ाया। वहीं, गोवर्धन तहसील के बछगांव गांव में ‘चप्पल’ होली का अनूठा आयोजन किया गया। इस परंपरा में गांव के बुजुर्ग बच्चों को चप्पलों से खेलखेल में मारते हैं, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

स्थानीय निवासी योगेश कुंतल ने बताया कि यह परंपरा एक-दूसरे के प्रति बिना किसी द्वेष के खेलने की है। यह प्रेम और सौहार्द का प्रतीक है। एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि 150 साल पुरानी यह परंपरा कभी अंग्रेजों के अत्याचारों का विरोध करने के लिए शुरू की गई थी। इस दौरान हुरियारे गुलाल उड़ाते हैं और होली के गीतों पर जमकर नृत्य करते हैं।

पुराने केशवदेव मंदिर के सेवायत बिहारीलाल गोस्वामी ने बताया कि शाम को भजन संध्या और फूलों की होली का कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर के अंदर होली नहीं मनाई जाती है, लेकिन फूलों की होली का आयोजन विशेष रूप से किया जाता है, जिसमें भक्तगण फूलों से होली खेलते हैं। श्री गरुण गोविंद मंदिर में सेवायत डॉक्टर राजेश गौतम ने कहा कि रंगभरी एकादशी से एक दिन पहले होली का त्योहार पारंपरिक हुरंगा के साथ समाप्त होता है।

स्थानीय व्यापारी हर्ष चतुर्वेदी ने कहा, ‘‘मथुरा में होली दूसरी जगहों से अलग है क्योंकि यहां हम भगवान कृष्ण की लीलाओं में से एक को फिर से जीते हैं। पिछले 30 दिनों से शहर के अलग-अलग हिस्सों में बड़े समारोह हो रहे हैं।’’ मथुरा में सुबह से ही लोग होली के गानों पर नाचते और एक-दूसरे को रंग लगाते दिखाई दिए।

पेशे से प्रोफेसर दीक्षा चौधरी ने कहा, मथुरा में होली मुझे खुशी देती है। मैं कृष्ण के करीब महसूस करती हूं। होली के मौके पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त भी किए गए हैं। अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण क्षेत्र) सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि पूरे जिले को नौ जोन और 40 सेक्टर में बांटा गया है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस टीमें तैनात की गई हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। मथुरा में होली का त्योहार शांति और सद्भाव के साथ मनाया गया।

मथुरा की होली, धर्म और संस्कृति का एक अनूठा संगम है। यह पर्व न केवल रंगों का त्योहार है, बल्कि यह भक्ति, प्रेम और उल्लास का भी प्रतीक है। हर साल लाखों श्रद्धालु इस अवसर पर मथुरा आते हैं और कृष्ण की नगरी में होली के रंगों में सराबोर हो जाते हैं। यह त्योहार मथुरा की पहचान बन चुका है और इसे पूरी दुनिया में जाना जाता है।

🔍 खबर का विश्लेषण

मथुरा की होली का महत्व धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टियों से बहुत अधिक है। यह त्योहार भगवान कृष्ण की लीलाओं का प्रतीक है और यह प्रेम, सौहार्द और एकता का संदेश देता है। इस खबर का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह मथुरा की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है और पर्यटन को बढ़ावा देता है। यह त्योहार लोगों को एक साथ लाता है और उन्हें खुशी और आनंद का अनुभव कराता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

❓ मथुरा में होली का क्या महत्व है?

मथुरा में होली का विशेष महत्व है क्योंकि यह भगवान कृष्ण की लीलाओं का प्रतीक है। यह त्योहार प्रेम, सौहार्द और एकता का संदेश देता है। मथुरा को कृष्ण की जन्मभूमि माना जाता है, इसलिए यहां होली का उत्सव विशेष रूप से मनाया जाता है।

❓ बांके बिहारी मंदिर में होली कैसे मनाई जाती है?

बांके बिहारी मंदिर में होली का उत्सव होलिका दहन के दिन समाप्त हो जाता है, लेकिन मंदिर के बाहर होली खेली जाती है। भक्तगण रंग और गुलाल उड़ाकर होली मनाते हैं। मंदिर में विशेष पूजा और आरती का आयोजन भी किया जाता है।

❓ बछगांव में ‘चप्पल’ होली क्या है?

बछगांव में ‘चप्पल’ होली एक अनूठी परंपरा है जिसमें गांव के बुजुर्ग बच्चों को चप्पलों से खेल-खेल में मारते हैं। यह परंपरा 150 साल पुरानी है और इसे अंग्रेजों के अत्याचारों का विरोध करने के लिए शुरू किया गया था। यह प्रेम और सौहार्द का प्रतीक है।

❓ मथुरा में होली के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी?

मथुरा में होली के दौरान सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। पूरे जिले को नौ जोन और 40 सेक्टर में बांटा गया था। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस टीमें तैनात की गई थीं ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

❓ मथुरा में होली का त्योहार कब तक चलता है?

मथुरा में होली का त्योहार रंगभरी एकादशी से एक दिन पहले पारंपरिक हुरंगा के साथ समाप्त होता है। हालांकि, पूरे महीने शहर में विभिन्न प्रकार के आयोजन होते रहते हैं, जिससे होली का माहौल बना रहता है।

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Source: Agency Inputs
 |  Published: 06 मार्च 2026

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