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पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान के स्वास्थ्य मूल्यांकन के तरीके पर गंभीर आपत्तियां उठाई गई हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता लतीफ खोसा ने पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) याह्या अफरीदी से औपचारिक रूप से संपर्क कर इस मामले में अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। यह शिकायत कथित तौर पर अडियाला जेल में “गुपचुप” तरीके से की गई एक चिकित्सा जांच से संबंधित है, जिसने व्यापक बहस छेड़ दी है।
जानकारी के अनुसार, यह घटना रविवार को सामने आई, जब डॉन अखबार ने सोमवार को इस विकास की सूचना दी। पीटीआई ने आरोप लगाया है कि पूर्व प्रधानमंत्री का चिकित्सा मूल्यांकन ऐसी परिस्थितियों में किया गया जो पारदर्शिता और स्थापित प्रक्रियाओं का उल्लंघन करती हैं। यह जांच सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद हुई थी, जिसमें 16 फरवरी से पहले इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने का निर्देश दिया गया था। अदालत को सूचित किया गया था कि इमरान खान की दाहिनी आंख की रोशनी केवल 15% बची है, जो उनकी बढ़ती उम्र और पहले से कमजोर स्वास्थ्य को देखते हुए एक गंभीर चिंता का विषय है।
भले ही डॉक्टरों की एक टीम ने 15 फरवरी को जेल में जाकर पूर्व प्रधानमंत्री की जांच की, लेकिन पीटीआई ने इस प्रक्रिया पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनकी मुख्य आपत्ति यह है कि इस मूल्यांकन के दौरान इमरान खान के परिवार के सदस्यों या उनके निजी, भरोसेमंद चिकित्सकों को शामिल नहीं किया गया। तोशाखाना मामले में इमरान खान के कानूनी सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे लतीफ खोसा ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि “परिवार या स्वतंत्र डॉक्टरों को सूचित किए बिना, गुप्त रूप से की गई जांच ने गंभीर आशंकाएं पैदा की हैं।”
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, खोसा के पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि “याचिकाकर्ता के स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी से उनके परिवार और निजी चिकित्सकों को लगातार बाहर रखने से ऐसे संदेह पैदा हुए हैं जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकती।” पीटीआई नेता ने आगे चेतावनी दी है कि इस तरह की गोपनीयता न केवल चिकित्सा प्रक्रिया में विश्वास को कम करती है, बल्कि इमरान खान के परिवार के सदस्यों, दोस्तों और समर्थकों के बीच अशांति और पीड़ा का कारण भी बन रही है।
* पीटीआई ने अडियाला जेल में इमरान खान की ‘गुप्त’ चिकित्सा जांच पर आपत्ति जताई।
* वरिष्ठ नेता लतीफ खोसा ने पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश से औपचारिक शिकायत की।
* जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर की गई थी, लेकिन प्रक्रिया पर पारदर्शिता की कमी का आरोप।
* इमरान खान की दाहिनी आंख की रोशनी केवल 15% बची है, और उनकी उम्र 73 वर्ष है।
* पीटीआई ने परिवार और निजी डॉक्टरों को जांच से बाहर रखने पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
* खुफिया जांच से विश्वास में कमी और व्यापक संदेह पैदा होने की चेतावनी दी गई।
लतीफ खोसा ने 73 वर्षीय इमरान खान की बढ़ती उम्र और बिगड़ते स्वास्थ्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “उनकी स्थिति न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे पाकिस्तान के लिए गंभीर चिंता का विषय है।” उन्होंने बताया कि व्यापक जनसमर्थन प्राप्त राजनीतिक हस्ती होने के बावजूद, पीटीआई संस्थापक को बुनियादी मानवीय आवश्यकताओं से वंचित किया जा रहा है, जबकि उनकी चिकित्सा स्थिति में देखभाल और पूर्ण पारदर्शिता की सख्त आवश्यकता है। यह घटना पाकिस्तान में राजनीतिक कैदियों के मानवाधिकारों और उपचार से संबंधित व्यापक सवालों को जन्म देती है।
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- पीटीआई ने अडियाला जेल में इमरान खान की ‘गुप्त’ चिकित्सा जांच पर आपत्ति जताई।
- वरिष्ठ नेता लतीफ खोसा ने पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश से औपचारिक शिकायत की।
- जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर की गई थी, लेकिन प्रक्रिया पर पारदर्शिता की कमी का आरोप।
- इमरान खान की दाहिनी आंख की रोशनी केवल 15% बची है, और उनकी उम्र 73 वर्ष है।
- पीटीआई ने परिवार और निजी डॉक्टरों को जांच से बाहर रखने पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
- खुफिया जांच से विश्वास में कमी और व्यापक संदेह पैदा होने की चेतावनी दी गई।
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स्रोत: Prabhasakshi
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