ट्रंप-मोदी के रिश्तों में गर्माहट: भारत-अमेरिका सहयोग के वैश्विक निहितार्थ और रण… Trump Modi India Us Relations
Government watch: Political update: विश्व की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियां, भारत और अमेरिका, जिनके रिश्ते हाल के वर्षों में कुछ तनावपूर्ण रहे थे, अब एक नई गर्माहट महसूस कर रही हैं। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच संबंधों की जमी बर्फ पिघलने के संकेत मिल रहे हैं, जिसके द्विपक्षीय और वैश्विक राजनीति पर गहरे प्रभाव पड़ सकते हैं। यह लेख इन बदलते समीकरणों और भारत की रणनीतिक चुनौतियों का विश्लेषण करता है।
विश्व के दो विशाल लोकतांत्रिक राष्ट्र, भारत और अमेरिका, अपनी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ, एक बार फिर घनिष्ठ संबंधों की ओर अग्रसर दिख रहे हैं। अनेक अंतर्राष्ट्रीय और द्विपक्षीय मतभेदों के बावजूद, दोनों देशों ने विभिन्न जटिल सहयोग क्षेत्रों में सहमति दर्शाई है, मानो ‘धीरे-धीरे प्यार को बढ़ाना है, हद से गुज़र जाना है’ की भावना चरितार्थ हो रही हो। इस बढ़ती निकटता के वैश्विक मायने गहरे हैं, संभवतः इसी से ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’ जैसे आदर्शों की पूर्ति सुनिश्चित होगी।
ऐसे में यह विचारणीय प्रश्न उठता है कि अमेरिका-भारत-यूरोपीय संघ (जो G7 देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं) और भारत-रूस-चीन (BRICS समूह के सदस्य) के बीच भारत अपनी गुटनिरपेक्षता और रणनीतिक स्वायत्तता को कैसे बनाए रख पाएगा। भविष्य की द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ताएं ही इस संतुलन की दिशा तय करेंगी। कूटनीतिक गलियारों में यह आशंका पहले से ही जताई जा रही है कि अमेरिका अपने इस बदले हुए दृष्टिकोण पर कब तक अटल रहेगा। क्या भारत को नियंत्रित करने या लुभाने की उसकी पुरानी प्रवृत्ति वाकई बदल गई है? और यदि ऐसा नहीं हुआ, तो ‘नया भारत’ इस पर क्या सुविचारित प्रतिक्रिया देगा?
भारत ने पहले ही अमेरिका को अपनी सामरिक शक्ति का ‘ट्रेलर’ दिखा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप डोनाल्ड ट्रंप, नौ महीने के अंतराल के बाद ही सही, लेकिन पुनः संयमित होते दिखे। इसका मुख्य कारण यह है कि भारत के पास द्विपक्षीय सहयोग के कई अन्य विकल्प मौजूद हैं, जो उसे वैश्विक मंच पर एक मजबूत स्थिति प्रदान करते हैं।
* **रिश्तों में गर्माहट:** ट्रंप और मोदी के बीच 2025 की गर्मियों में ठंडे पड़े संबंध अब 2026 की शुरुआत में फिर से प्रगाढ़ हो रहे हैं।
* **रणनीतिक स्वायत्तता:** भारत को G7 और BRICS जैसे गुटों के बीच अपनी रणनीतिक संतुलन और गुटनिरपेक्षता बनाए रखने की चुनौती।
* **तनाव के पुराने कारण:** 2025 में अमेरिकी टैरिफ वृद्धि, भारत के रूस से तेल व हथियार खरीद और ट्रंप का पाकिस्तान के प्रति नरम रुख मुख्य वजहें थीं।
* **भारत का मजबूत रुख:** भारत द्वारा अपनी सामरिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने से अमेरिका के रुख में बदलाव आया।
* **वैश्विक निहितार्थ:** दोनों देशों की बढ़ती निकटता के ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ जैसे वैश्विक आदर्शों पर प्रभाव।
* **अमेरिकी इरादों पर संदेह:** कूटनीतिक हलकों में अमेरिका के बदले हुए स्टैंड की स्थिरता को लेकर आशंकाएं मौजूद हैं।
वस्तुतः, 2025 की गर्मियों में व्यापारिक खींचतान, रूस के साथ भारत के सशक्त संबंधों और टैरिफ युद्ध के कारण डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के रिश्ते ठंडे पड़ गए थे। ट्रंप प्रशासन ने भारत के वस्त्रों, ऑटो पार्ट्स और रत्नों सहित कई निर्यातों पर 50% तक टैरिफ बढ़ा दिए थे, जिससे द्विपक्षीय व्यापार वार्ताएं बाधित हुईं। इसके अतिरिक्त, रूस से भारत द्वारा तेल और हथियारों की खरीद अमेरिका को रास नहीं आई, और पाकिस्तान के प्रति ट्रंप का अपेक्षाकृत नरम रवैया भी विवाद का विषय बना। परंतु, फरवरी 2026 आते-आते ये संबंध पुनः प्रगाढ़ होने लगे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि उनके बीच एक नया ‘वसंत’ जागृत हुआ है, जिसमें आर्थिक सहयोग और रणनीतिक जुड़ाव के संकेत मिल रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ‘नई सुबह’ कितनी स्थायी रहती है और भारत अपनी वैश्विक भूमिका को कैसे निभाता है।
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- ट्रंप और मोदी के बीच 2025 की गर्मियों में ठंडे पड़े संबंध अब 2026 की शुरुआत में फिर से प्रगाढ़ हो रहे हैं।
- भारत को G7 और BRICS जैसे गुटों के बीच अपनी रणनीतिक संतुलन और गुटनिरपेक्षता बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
- 2025 में अमेरिकी टैरिफ वृद्धि, भारत के रूस से तेल व हथियार खरीद और ट्रंप का पाकिस्तान के प्रति नरम रुख तनाव के मुख्य कारण थे।
- भारत द्वारा अपनी सामरिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने से अमेरिका के रुख में बदलाव आया है।
- दोनों देशों की बढ़ती निकटता के ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ जैसे वैश्विक आदर्शों पर गहरे प्रभाव हैं।
- कूटनीतिक हलकों में अमेरिका के बदले हुए स्टैंड की स्थिरता को लेकर अभी भी आशंकाएं मौजूद हैं।
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स्रोत: Prabhasakshi
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