मुजफ्फरनगर दंगा 2013: हत्या और आगजनी मामले में 22 आरोपी साक्ष्य के अभाव में दोषम… Muzaffarnagar Riots 22 Acquitted
India today: India news: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। साल 2013 में हुए भीषण सांप्रदायिक दंगों से जुड़े एक मामले में, स्थानीय अदालत ने हत्या, लूट और आगजनी के आरोपों का सामना कर रहे बाईस (22) व्यक्तियों को बरी कर दिया है। यह फैसला सबूतों के अभाव के कारण सुनाया गया है, जिससे न्यायपालिका में अभियोजन पक्ष की भूमिका पर सवाल उठे हैं।
सरकारी वकील नरेंद्र शर्मा ने रविवार को मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कनिष्क कुमार की अदालत ने शनिवार को अपना फैसला सुनाया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष इन आरोपियों के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह से विफल रहा। न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपियों को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं थे, जिसके चलते उन्हें दोषमुक्त करना पड़ा।
यह मामला भौराकला थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर रायसिंह गांव में 8 सितंबर 2013 को हुई हिंसक घटनाओं से संबंधित था। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने इन घटनाओं की गहन जांच के बाद कुल छब्बीस (26) लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। हालांकि, मुकदमे की कार्यवाही के दौरान चार आरोपियों का निधन हो गया, जिसके बाद शेष बाईस (22) अभियुक्तों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया जारी रही और उन पर हत्या, लूट तथा आगजनी जैसे आरोपों में सुनवाई हुई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, हनीफ नामक व्यक्ति ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि सैकड़ों दंगाई उनके गांव में घुस आए थे। इन दंगाइयों ने घरों पर अंधाधुंध हमला किया, मूल्यवान संपत्तियों को लूटा और बाद में कई घरों में आग लगा दी। शिकायत में यह भी बताया गया था कि इस नृशंस हमले के दौरान शिकायतकर्ता के पिता रहीसुद्दीन को बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला गया था। दंगाइयों पर एक मस्जिद को क्षतिग्रस्त करने और एक पुलिस कांस्टेबल की मोटरसाइकिल को आग लगाने का भी गंभीर आरोप लगाया गया था।
दोषमुक्त किए गए आरोपियों में मोहम्मदपुर रायसिंह गांव के निवासी अनिल, सुभाष, संजीव, करण, शेर सिंह, ऋषिपाल, हंसपाल, प्रमोद, विक्की, बादल, मदन, जय नारायण, बृजवीर, विनोद, काला, प्रवीण, जगपाल, प्रेमपाल, पप्पू, नीतू, भूरा और हरेंद्र सिंह शामिल हैं। अदालत के इस फैसले से दंगा पीड़ितों में निराशा फैल सकती है, जबकि आरोपियों के परिवारों के लिए यह एक बड़ी राहत है।
गौरतलब है कि 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे उत्तर प्रदेश के इतिहास के सबसे घातक सांप्रदायिक संघर्षों में से एक थे। इन दंगों में साठ (60) से अधिक लोगों की जान चली गई थी और लगभग चालीस हजार (40,000) से अधिक लोग अपने घरों से विस्थापित होकर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए थे। इन दंगों ने समाज पर गहरा प्रभाव डाला था और इनकी यादें आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं।
**मुख्य अंश:**
* मुजफ्फरनगर की अदालत ने 2013 के दंगा मामले में 22 आरोपियों को बरी किया।
* अभियोजन पक्ष हत्या, लूट और आगजनी के आरोपों को सिद्ध करने में विफल रहा।
* यह मामला मोहम्मदपुर रायसिंह गांव में 8 सितंबर 2013 को हुई हिंसक घटना से जुड़ा था।
* शिकायतकर्ता हनीफ ने अपने पिता रहीसुद्दीन की पीट-पीटकर हत्या का आरोप लगाया था।
* 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों में 60 से अधिक मौतें और 40,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए थे।
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- मुजफ्फरनगर की अदालत ने 2013 के दंगा मामले में 22 आरोपियों को बरी किया।
- अभियोजन पक्ष हत्या, लूट और आगजनी के आरोपों को सिद्ध करने में विफल रहा।
- यह मामला मोहम्मदपुर रायसिंह गांव में 8 सितंबर 2013 को हुई हिंसक घटना से जुड़ा था।
- शिकायतकर्ता हनीफ ने अपने पिता रहीसुद्दीन की पीट-पीटकर हत्या का आरोप लगाया था।
- 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों में 60 से अधिक मौतें और 40,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए थे।
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स्रोत: Prabhasakshi
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