ट्रंप और मोदी के संबंधों में फिर लौटी गरमाहट: वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका Trump Modi Us India Warms
Political update: Political update: दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं, अमेरिका और भारत के बीच राजनीतिक संबंधों में एक बार फिर से गर्माहट देखने को मिल रही है। दोनों देशों के शीर्ष नेता, डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी, के बीच की पुरानी दूरियाँ अब कम होती दिख रही हैं, जिससे द्विपक्षीय सहयोग के नए द्वार खुलने की उम्मीद है। यह बदलाव न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति के लिए भी गहरे मायने रखता है।
एक दौर था जब भारत और अमेरिका के रिश्ते कई चुनौतियों से जूझ रहे थे, लेकिन अब प्रेम और सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत हुई है। जटिल वैश्विक परिदृश्य के बीच विभिन्न रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर दोनों देशों ने सहमति दिखाई है, जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’ जैसे भारतीय दर्शन के सिद्धांतों को वैश्विक पटल पर मजबूत कर सकता है। यह नई तालमेल सिर्फ एक द्विपक्षीय घटना नहीं, बल्कि इसके दूरगामी वैश्विक निहितार्थ हैं।
2025 की गर्मियों में डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के बीच के संबंध काफी तनावपूर्ण हो गए थे। व्यापारिक मतभेद, रूस से भारत के पारंपरिक भरोसेमंद रिश्ते और टैरिफ को लेकर चले ‘टैरिफ युद्ध’ ने इन रिश्तों में खासी कड़वाहट घोल दी थी। विशेष रूप से, ट्रंप प्रशासन ने भारतीय वस्त्रों, ऑटो पार्ट्स और रत्नों सहित कई निर्यात वस्तुओं पर 50% तक टैरिफ बढ़ा दिए थे, जिससे द्विपक्षीय व्यापार वार्ता रुक गई थी। इसके अतिरिक्त, भारत का रूस से तेल और हथियारों की खरीद जारी रखना अमेरिका को रास नहीं आया था, और पाकिस्तान के प्रति ट्रंप का नरम रुख भी विवाद का कारण बना था। हालांकि, फरवरी 2026 आते-आते इन संबंधों में नई ऊर्जा और आर्थिक रोमांस का संचार होता दिख रहा है, जो भविष्य के मजबूत रणनीतिक सहयोग की ओर इशारा करता है।
इस बदलते परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठता है कि भारत किस प्रकार अमेरिका-भारत-यूरोपीय संघ (G7) प्रभुत्व वाले प्रेम त्रिकोण और भारत-रूस-चीन (BRICS) देश वाले प्रेम त्रिकोण के बीच संतुलन स्थापित करेगा। अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और गुटनिरपेक्षता को बनाए रखते हुए भारत इन विभिन्न गुटों के साथ कब, कैसे और कितना सामंजस्य बिठा पाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा। क्योंकि भविष्य की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था इन्हीं द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ताओं पर निर्भर करेगी।
* ट्रंप और मोदी के बीच बिगड़े संबंधों में अब नई गर्मजोशी आ रही है, जो वैश्विक राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है।
* साल 2025 में व्यापारिक टैरिफ, रूस से भारत के रिश्तों और पाकिस्तान नीति के कारण संबंध तनावपूर्ण हो गए थे।
* भारत को G7 और BRICS जैसे गुटों के बीच अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और गुटनिरपेक्षता बनाए रखने की चुनौती है।
* अमेरिका के बदले हुए रुख पर संदेह बना हुआ है, लेकिन भारत ने अपनी दृढ़ कूटनीति का प्रदर्शन किया है।
* भारत के पास कई द्विपक्षीय विकल्प हैं, जो उसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मजबूत स्थिति प्रदान करते हैं।
* यह संबंध ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ जैसे भारतीय सिद्धांतों को वैश्विक पटल पर मजबूती दे सकता है।
कूटनीतिक गलियारों में यह आशंका भी जताई जा रही है कि आखिर अमेरिका अपने इस बदले हुए रुख पर कब तक कायम रह पाएगा? क्या भारत को अपने भू-राजनीतिक हितों के दायरे में लाने या फंसाने की उसकी पुरानी प्रवृत्ति सचमुच बदल गई है? यदि नहीं, तो ऐसे में ‘नए भारत’ की प्रतिक्रिया क्या होगी? गौरतलब है कि भारत ने पहले ही अपनी रणनीतिक दृढ़ता का परिचय अमेरिका को दिया है, जिसके कारण नौ महीने के बाद ही ट्रंप को अपने रुख में बदलाव लाना पड़ा। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत के पास द्विपक्षीय विकल्पों की कोई कमी नहीं है, और वह अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।
कुल मिलाकर, डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के बीच रिश्तों में आई यह नई गरमाहट केवल दो शक्तिशाली नेताओं का व्यक्तिगत मेलजोल नहीं, बल्कि यह भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति का प्रतीक है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह संबंध आगे चलकर किस दिशा में बढ़ते हैं और वैश्विक मंच पर भारत किस तरह अपने हितों को साधते हुए संतुलन बनाए रखता है। Stay updated with साधनान्यूज़.com for more news.
- ट्रंप और मोदी के बीच बिगड़े संबंधों में अब नई गर्मजोशी आ रही है, जो वैश्विक राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है।
- साल 2025 में व्यापारिक टैरिफ, रूस से भारत के रिश्तों और पाकिस्तान नीति के कारण संबंध तनावपूर्ण हो गए थे।
- भारत को G7 और BRICS जैसे गुटों के बीच अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और गुटनिरपेक्षता बनाए रखने की चुनौती है।
- अमेरिका के बदले हुए रुख पर संदेह बना हुआ है, लेकिन भारत ने अपनी दृढ़ कूटनीति का प्रदर्शन किया है।
- भारत के पास कई द्विपक्षीय विकल्प हैं, जो उसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मजबूत स्थिति प्रदान करते हैं।
- यह संबंध ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ जैसे भारतीय सिद्धांतों को वैश्विक पटल पर मजबूती दे सकता है।
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स्रोत: Prabhasakshi
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