राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह में सलमान खान; मोहन भागवत ने कहा- भारत… Salman Khan Rss Centenary Mumbai
Country spotlight: **National update:** मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष समारोह में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की उपस्थिति ने सबका ध्यान खींचा। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस मौके पर ‘हिंदुत्व’ के व्यापक अर्थ पर प्रकाश डाला और संघ की भूमिका को स्पष्ट किया।
शनिवार को मुंबई में आयोजित इस खास कार्यक्रम में, जहां संघ अपने गौरवशाली सौ वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा था, सलमान खान फिल्म निर्माता सुभाष घई और गीतकार प्रसून जोशी के साथ मंच के सामने बैठे नजर आए। उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत के महत्वपूर्ण संबोधन को ध्यान से सुना, जिसमें राष्ट्र और समाज को लेकर संघ की दृष्टि पर विस्तार से चर्चा की गई।
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में ‘हिंदू’ शब्द की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है, यह किसी विशिष्ट पूजा पद्धति या धर्म विशेष से जुड़ा शब्द नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी समुदाय या विचारधारा के विरुद्ध नहीं है और न ही उसे किसी प्रकार की सत्ता या राजनीतिक शक्ति की लालसा है। संघ का प्राथमिक उद्देश्य समाज और राष्ट्र की सेवा करना है।
भागवत ने राजनीति में संघ की सीधी भागीदारी से इनकार किया, हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि संघ के कई स्वयंसेवक विभिन्न राजनीतिक दलों में सक्रिय हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि वे एक स्वयंसेवक हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संघ की अपनी पार्टी नहीं है, बल्कि उसमें संघ के विचारों से प्रेरित कई स्वयंसेवक शामिल हैं।
**मोहन भागवत के संबोधन के मुख्य बिंदु:**
* मुंबई में RSS के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में सलमान खान, सुभाष घई और प्रसून जोशी की उपस्थिति।
* मोहन भागवत ने ‘हिंदू’ शब्द को राष्ट्रीय पहचान बताया, न कि किसी विशिष्ट धर्म या समुदाय का नाम।
* संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि RSS न तो किसी के खिलाफ है और न ही उसे सत्ता की आकांक्षा है।
* भागवत ने आजादी के समय के समाज सुधारकों और RSS संस्थापक डॉ. हेडगेवार के योगदान को याद किया।
* देश के विभाजन का कारण धार्मिक मतभेद और ‘हिंदू भाव’ को भूलना बताया गया।
* मोहन भागवत ने कहा कि RSS भाजपा को नियंत्रित नहीं करता, इसे किसी राजनीतिक दल के चश्मे से देखना अनुचित है।
भागवत ने भारत के विभाजन को धर्म आधारित बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि भारत में इस्लाम और ईसाई धर्म आज भी सह-अस्तित्व में हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिंदू धर्म की भावना सभी धर्मों के सम्मान की शिक्षा देती है, और इसी भावना को भूलना भी विभाजन का एक कारण बना।
अपने भाषण में, मोहन भागवत ने समाज सुधारकों जैसे राजा राम मोहन रॉय, स्वामी विवेकानंद और दयानंद सरस्वती के विचारों की सराहना की, जिन्होंने देश के सामाजिक जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के त्याग और स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका को भी याद किया। हेडगेवार ने मात्र 13 वर्ष की आयु में अपने माता-पिता को खो दिया था और चिकित्सीय शिक्षा के दौरान क्रांतिकारियों से जुड़कर ‘कोकेन’ कोडनेम से गुप्त रूप से काम किया था। यह किस्सा रास बिहारी बोस की किताब में भी वर्णित है, जो उनके अदम्य साहस और देशभक्ति का प्रमाण है।
संघ प्रमुख ने अंत में यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी राजनीतिक दल, जैसे भाजपा या विश्व हिंदू परिषद, को नियंत्रित नहीं करता। उन्होंने कहा कि संघ को किसी पार्टी के नजरिए से देखना गलत है, क्योंकि संघ एक व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है जिसका लक्ष्य संपूर्ण समाज का उत्थान है।
मोहन भागवत के ये विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा और राष्ट्र के प्रति उसके दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। मुंबई में आयोजित यह कार्यक्रम संघ के इतिहास और भविष्य की दिशा पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव था, जिसने समाज में ‘हिंदुत्व’ और राष्ट्रवाद के प्रति एक नई समझ पैदा करने का प्रयास किया। Stay updated with साधनान्यूज़.com for more news.
- मुंबई में RSS के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में सलमान खान, सुभाष घई और प्रसून जोशी की उपस्थिति।
- मोहन भागवत ने ‘हिंदू’ शब्द को राष्ट्रीय पहचान बताया, न कि किसी विशिष्ट धर्म या समुदाय का नाम।
- संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि RSS न तो किसी के खिलाफ है और न ही उसे सत्ता की आकांक्षा है।
- भागवत ने आजादी के समय के समाज सुधारकों और RSS संस्थापक डॉ. हेडगेवार के योगदान को याद किया।
- देश के विभाजन का कारण धार्मिक मतभेद और ‘हिंदू भाव’ को भूलना बताया गया।
- मोहन भागवत ने कहा कि RSS भाजपा को नियंत्रित नहीं करता, इसे किसी राजनीतिक दल के चश्मे से देखना अनुचित है।
Stay updated with साधनान्यूज़.com for more news.
स्रोत: Dainik Bhaskar
अधिक पढ़ने के लिए: Education Updates
