बलूचिस्तान में आतंक का बढ़ता साया: एक्टिविस्टों का दावा – ‘हर युवा सुरक्षा बलों … Balochistan Human Rights Crisis
Global story: Global update: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकारों की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। हाल ही में जबरन गुमशुदगी की घटनाओं में तेजी आई है, जिससे स्थानीय युवाओं में गहरा भय व्याप्त है। एक प्रमुख एक्टिविस्ट ने दावा किया है कि इस क्षेत्र का हर युवा सुरक्षा बलों की मनमानी कार्रवाई के डर में जी रहा है।
ताजा मामले के तौर पर, 22 जनवरी को ग्वादर से संघीय उर्दू विश्वविद्यालय और तुरबत विश्वविद्यालय के स्नातक, बलाच और अहसान बलूच को कथित तौर पर जबरन अगवा कर लिया गया था। उनके लापता होने के बाद से, उनके परिवारों को उनकी स्थिति या ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है, जिससे उनके परिजन गहरे सदमे में हैं।
सोशल मीडिया पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए, सामाजिक कार्यकर्ता सम्मी बलूच ने जोर देकर कहा कि ये गुमशुदगी की घटनाएं अकेली नहीं हैं। उन्होंने बताया कि जबरन लापता किए जाने के मामले खतरनाक दर से बढ़ रहे हैं, और इसका सबसे ज्यादा असर युवा व शिक्षित वर्ग पर पड़ रहा है। सम्मी ने राज्य सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की कठोर आलोचना करते हुए कहा कि वे पूरी तरह से मनमानी ढंग से काम करते हैं, और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या जवाबदेही के किसी भी व्यक्ति को कभी भी उठा सकते हैं। इससे पूरे क्षेत्र में एक आतंक का माहौल बन गया है, जहां प्रत्येक युवा स्वयं को अगला शिकार बनने के निरंतर भय में पाता है।
सम्मी ने आगे लिखा कि ये जबरन गुमशुदगी सिर्फ व्यक्तियों को निशाना नहीं बनातीं, बल्कि पूरे समुदाय को दंडित करती हैं। पूरे समुदाय को संदिग्ध मानकर, ये कार्रवाइयां पूरे प्रांत को एक अनिश्चितता के कगार पर धकेल देती हैं, जिससे सामान्य जीवन प्रतीक्षा, शोक और भय के एक चक्र में बदल जाता है।
**मुख्य बातें:**
* बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है, खासकर युवा और शिक्षित वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है।
* एक्टिविस्टों का आरोप है कि सुरक्षा बल मनमानी कार्रवाई करते हैं और बिना कानूनी प्रक्रिया के लोगों को उठा लेते हैं।
* इस स्थिति ने पूरे प्रांत में गहरा आतंक और भय का माहौल पैदा कर दिया है, जहाँ हर युवा खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।
* लापता किए गए व्यक्तियों के परिवारों को उनके ठिकाने या स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जाती।
* मानवाधिकार संगठनों ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए जवाबदेही की मांग की है।
मानवाधिकार संगठनों ने बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी की बढ़ती संख्या पर लगातार चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अधिकारियों से लापता व्यक्तियों के बारे में तुरंत जानकारी उपलब्ध कराने और इन उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
बलूचिस्तान पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, 25 जनवरी को बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) द्वारा ‘बलूच नरसंहार स्मरण दिवस’ के रूप में मनाया गया। बलूचिस्तान और बलूच बहुल क्षेत्रों में लोगों ने इस दिन को सेमिनारों, कैंडल मार्चों और जागरूकता अभियानों के माध्यम से याद किया। आयोजकों ने बताया कि यह दिन उन सभी पीड़ितों को समर्पित था, जिन्हें जबरन गायब किया गया, गैर-न्यायिक हत्याओं का शिकार बनाया गया, या जिनके मानवाधिकारों का कथित तौर पर उल्लंघन किया गया। कई शहरों और कस्बों में आयोजित इन कार्यक्रमों ने क्षेत्र में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति के प्रति बढ़ती चिंता को दर्शाया।
बलूचिस्तान में गहराता यह संकट, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संस्थाओं के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए, साधनान्यूज़.com पर बने रहें।
- बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी की घटनाओं में वृद्धि, खासकर युवा और शिक्षित वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है।
- एक्टिविस्टों का आरोप है कि सुरक्षा बल मनमानी कार्रवाई करते हैं, बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के लोगों को उठा लेते हैं।
- इस स्थिति ने पूरे प्रांत में गहरा आतंक और भय का माहौल पैदा कर दिया है, जहाँ हर युवा खुद को असुरक्षित महसूस करता है।
- लापता किए गए व्यक्तियों के परिवारों को उनके ठिकाने या स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जाती।
- मानवाधिकार संगठनों ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए जवाबदेही की मांग की है।
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स्रोत: Prabhasakshi
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