PSLV मिशन की लगातार विफलता: भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के सामने चुनौतियाँ उजागर Isro Pslv Program Challenges
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PSLV मिशन की लगातार विफलता: भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के सामने चुनौतियाँ उजागर Isro Pslv Program Challenges
साधनान्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम को हाल के महीनों में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का विश्वसनीय माना जाने वाला PSLV रॉकेट लगातार दूसरी बार अपने मिशन को पूरी तरह से सफल नहीं कर पाया है, जिससे राष्ट्रीय तकनीकी गुणवत्ता और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
ताजा घटनाक्रम में, 12 जनवरी को श्रीहरिकोटा से सुबह 10:17 बजे लॉन्च किए गए PSLV-C62 मिशन में गड़बड़ी सामने आई।
उड़ान के लगभग 50 मिनट बाद, इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने पुष्टि की कि रॉकेट के तीसरे चरण में एक असामान्यता दर्ज की गई, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है।
यह विफलता ऐसे समय में आई है जब देश अपने अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
यह झटका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले 18 मई, 2025 को PSLV-C61 मिशन भी असफल रहा था, जो वर्षों से ‘वर्कहॉर्स’ कहे जाने वाले इस रॉकेट के लिए एक दुर्लभ और अप्रत्याशित घटना थी।
उस मिशन का मुख्य पेलोड EOS-09 उपग्रह था, जिसे पृथ्वी की हर मौसम में निगरानी, आपदा प्रबंधन और रणनीतिक जरूरतों के लिए डिज़ाइन किया गया था।
PSLV एक चार चरणों वाला रॉकेट है, और C61 मिशन में इसके XL संस्करण का उपयोग किया गया था।
इन लगातार विफलताओं ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की विश्वसनीयता पर चिंताएं बढ़ाई हैं और केंद्र सरकार को इस दिशा में गहन विश्लेषण और सुधारों की आवश्यकता महसूस हो रही है।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को उच्च प्राथमिकता दी गई है, ऐसे में यह विफलता गंभीर चिंतन का विषय है।
- PSLV-C62 मिशन में तकनीकी खराबी: 12 जनवरी को PSLV का तीसरा चरण असफल रहा।
- ISRO के ‘वर्कहॉर्स’ PSLV की लगातार दूसरी विफलता, C61 भी रहा था असफल।
- भारत के राष्ट्रीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे।
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Posted on 14 January 2026 | Follow साधनान्यूज़.com for the latest updates.
