तेज विकास दर के दावे के बावजूद: भारत की अर्थव्यवस्था में नीतिगत चुनौतियाँ क्यों? India Economic Reality Check
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तेज विकास दर के दावे के बावजूद: भारत की अर्थव्यवस्था में नीतिगत चुनौतियाँ क्यों? India Economic Reality Check
साधनान्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आर्थिक विकास दर भले ही उच्च दिख रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही संकेत दे रही है।
देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह लगातार कम हो रहा है, जो बाहरी निवेशकों के बीच भारत की 8% से अधिक की जीडीपी वृद्धि दर के पीछे छिपी बुनियादी कमजोरियों पर चिंता व्यक्त करता है।
यह स्थिति देश की [राजनीति] और आर्थिक नीतियों के समक्ष एक बड़ी चुनौती पेश करती है।
आम तौर पर, कॉर्पोरेट राजस्व अर्थव्यवस्था के साथ ही बढ़ता है, लेकिन पिछले वर्ष भारत में सूचीबद्ध कंपनियों की कॉर्पोरेट राजस्व वृद्धि दर, जीडीपी वृद्धि की तुलना में मुश्किल से आधी रही, जो एक अप्रत्याशित प्रवृत्ति है।
इससे स्पष्ट होता है कि विकास के दावों के बावजूद, व्यापारिक क्षेत्र को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।
इन आंकड़ों से संतुष्ट होने के बजाय, देश के [नेता] और नीति-निर्माताओं को इन समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देना होगा।
कमजोरी के प्रमुख संकेतों में एक चिंताजनक तथ्य यह है कि भारत से पहले की तुलना में अधिक लोग पलायन कर रहे हैं, जबकि यह बहुत कम पूंजी आकर्षित कर पा रहा है।
इस दशक में हर साल औसतन 6.75 लाख लोग भारत से बाहर जाकर बस रहे हैं, जो 2010 के दशक में 3.25 लाख था।
इतने बड़े पैमाने पर पलायन केवल पाकिस्तान, बांग्लादेश और यूक्रेन जैसे देशों ने ही देखा है, जहाँ की आंतरिक [राजनीति] अस्थिर रही है।
चीन भी अभी भी पिछले दशक की तरह ही सालाना लगभग 3 लाख लोगों को प्रवास करते देखता है, लेकिन भारत का आंकड़ा तुलनात्मक रूप से अधिक चिंताजनक है।
यह प्रवृत्ति आगामी [चुनाव] में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन आर्थिक और सामाजिक रुझानों पर तत्काल ध्यान देना आवश्यक है।
यदि वर्तमान [सत्ताधारी दल] या भविष्य में [कांग्रेस] या [बीजेपी] जैसे दल इन चुनौतियों का समाधान नहीं करते हैं, तो भारत की विकास गाथा पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।
यह सिर्फ आर्थिक आंकड़े नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य और नागरिकों के भरोसे का मामला है, जिसे सही नीतियों और प्रभावी नेतृत्व के माध्यम से ही पुनः स्थापित किया जा सकता है।
- विदेशी पूंजी प्रवाह में कमी, जीडीपी वृद्धि पर सवाल।
- कॉर्पोरेट राजस्व वृद्धि दर जीडीपी से आधी, चिंताजनक स्थिति।
- पलायन में वृद्धि: हर साल 6.75 लाख लोग भारत छोड़ रहे हैं।
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Posted on 13 January 2026 | Keep reading साधनान्यूज़.com for news updates.
