2026 का भारत: हमारी राजनीति का कैसा हो भविष्य? राजनीति Sardesai Envisions India’s Future
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2026 का भारत: हमारी राजनीति का कैसा हो भविष्य? राजनीति Sardesai Envisions India’s Future
साधनान्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रख्यात पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने अपने कॉलम में 2026 के भारत के लिए एक दूरदर्शी कल्पना प्रस्तुत की है, जहां राष्ट्र अतीत की बहस छोड़कर एक उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर हो।
यह दृष्टि रवींद्रनाथ ठाकुर के ‘स्वतंत्रता के स्वर्ग’ की प्रेरणा से जन्मी है, जिसमें एक ऐसे भारत की परिकल्पना की गई है जो संकीर्ण दीवारों से मुक्त हो और ज्ञान तथा प्रगति को प्राथमिकता दे।
सरदेसाई का विश्लेषण वर्तमान भारतीय *राजनीति* पर मुखर टिप्पणी करता है, जहां हमारे *नेता* अक्सर ऐतिहासिक मुद्दों जैसे 1930 के दशक में ‘वंदे मातरम्’ से हटाए गए अंतरे या 1950 के दशक में नेहरू की भूमिका पर घंटों खर्च करते हैं।
इसके बजाय, यह कॉलम इस बात पर जोर देता है कि मौजूदा *राजनीति* का ध्यान इस पर होना चाहिए कि वर्तमान नेतृत्व बेहतर भारत के निर्माण के लिए आज क्या ठोस कदम उठा रहा है।
*चुनाव* के दौरान वोट जातिगत और धार्मिक विभाजन को भड़काने के बजाय, शासन से जुड़े वास्तविक मुद्दों, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास पर मांगे जाने चाहिए।
*कांग्रेस* और *बीजेपी* सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
यह भी रेखांकित किया गया है कि इतिहास को केवल ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ के पाठ्यक्रम तक सीमित न किया जाए और उपासना-स्थलों के निर्माण के बजाय गुणवत्तापूर्ण स्कूल और अस्पतालों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित हो।
यह *राजनीति* केवल दोषारोपण की नहीं, बल्कि समाधान की होनी चाहिए।
2026 का भारत वह हो जहां नागरिकों को भय से मुक्ति मिले, ज्ञान स्वतंत्र हो, और देश प्रगति के पथ पर निर्बाध चले।
यह एक ऐसे भारत का आह्वान है जहां हर *नेता* और *चुनाव* प्रक्रिया का लक्ष्य देश के हर नागरिक का समग्र उत्थान हो।
- 2026 के भारत के लिए प्रगतिशील राजनीतिक दृष्टिकोण का आह्वान।
- चुनाव में जातिगत-धार्मिक विभाजन के बजाय शासन के मुद्दों पर बल।
- उपासना-स्थलों के बजाय गुणवत्तापूर्ण स्कूलों व अस्पतालों के निर्माण की वकालत।
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Posted on 02 January 2026 | Stay updated with साधनान्यूज़.com for more news.
