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अरावली खनन पर केंद्र सरकार का कड़ा रुख: पर्यावरण-राजनीति का नया मोड़? Aravalli Protests Government Response

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अरावली खनन पर केंद्र सरकार का कड़ा रुख: पर्यावरण-राजनीति का नया मोड़? Aravalli Protests Government Response news image

अरावली खनन पर केंद्र सरकार का कड़ा रुख: पर्यावरण-राजनीति का नया मोड़? Aravalli Protests Government Response

साधनान्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के लिए प्राकृतिक वरदान समझी जाने वाली अरावली पर्वतश्रृंखला पर जारी विरोध प्रदर्शनों और प्रस्तावित अरावली सत्याग्रह के मद्देनजर केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

सरकार ने विभिन्न राज्यों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि इस संवेदनशील पर्वतमाला क्षेत्र में अब किसी भी प्रकार के नए खनन पट्टे (माइनिंग लीज) जारी न किए जाएं।

इस निर्णय से यह साफ संकेत मिलता है कि अरावली के पर्यावरण संरक्षण को लेकर जो गहन **राजनीति** चल रही थी, उसके बीच केंद्र सरकार अब अत्यधिक सजग हो गई है।

जनहित के मद्देनजर उठाए गए इस कदम से अरावली की जैव विविधता के संरक्षण की उम्मीदें बढ़ी हैं, और यह देश की राजधानी नई दिल्ली के लिए एक शुभ पहल साबित हो सकती है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने गत बुधवार को इस संबंध में एक नया आदेश जारी किया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यह प्रतिबंध गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक फैली पूरी अरावली श्रृंखला पर समान रूप से लागू होगा।

मंत्रालय के इस फैसले को अरावली को एक महत्वपूर्ण पर्वतमाला के रूप में सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे यहां के जल संरक्षण, वायु गुणवत्ता में सुधार और समग्र पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक प्रभाव जल्द दिखने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय न केवल पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह दीर्घकालिक **राजनीतिक** परिणामों को भी प्रभावित करेगा, खासकर उन राज्यों में जहां अरावली से जुड़े मुद्दे **चुनावों** में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।

विभिन्न **नेता** और पर्यावरणविद लंबे समय से इस दिशा में सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे थे, और इस आदेश को उनकी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, इस आदेश के पीछे **कांग्रेस** और **बीजेपी** सहित विभिन्न दलों के बीच अरावली के भविष्य को लेकर चल रही बहस भी एक महत्वपूर्ण कारक रही है।

पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने का यह कदम केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और भविष्य की पर्यावरणीय **राजनीति** के लिए एक नजीर स्थापित कर सकता है।

यदि यह प्रतिबंध प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए अरावली के प्राकृतिक सौंदर्य और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में मील का पत्थर साबित होगा।

  • केंद्र सरकार ने अरावली में नए खनन पट्टों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया।
  • प्रतिबंध गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक लागू होगा।
  • पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण की बढ़ी उम्मीदें।

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Posted on 30 December 2025 | Follow साधनान्यूज़.com for the latest updates.

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