दीनदयाल उपाध्याय: एकात्म मानववाद और राजनीति का संगम? राजनीति Modi Highlights Upadhyaya’s Legacy
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दीनदयाल उपाध्याय: एकात्म मानववाद और राजनीति का संगम? राजनीति Modi Highlights Upadhyaya’s Legacy
साधनान्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 109वीं जयंती पर उनके विचारों की प्रासंगिकता पर बहस छिड़ी हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी के कई नेताओं ने उनके योगदान को याद किया है।
उपाध्याय के ‘एकात्म मानववाद’ के दर्शन, जो पश्चिमी पूँजीवाद और साम्यवाद के बीच एक तीसरा रास्ता प्रस्तुत करते हैं, आज भी भारतीय राजनीति में गूँजते हैं।
उनका मानना था कि मानव केवल आर्थिक या सामाजिक प्राणी नहीं, अपितु आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं का समन्वय है।
‘अंत्योदय’ का सिद्धांत, जिसमें सबसे पिछड़े वर्गों के उत्थान को विकास का केंद्र माना गया है, आज भी कई चुनावों में प्रमुख मुद्दा बना रहता है।
उपाध्याय के विचारों ने कांग्रेस जैसी पार्टियों को भी प्रभावित किया है, हालाँकि विभिन्न दलों द्वारा उनकी व्याख्या और कार्यान्वयन में अंतर स्पष्ट है।
यह विचारधारा भारतीय राजनीति में चुनावों के दौरान नेताओं द्वारा अपने-अपने तरीके से प्रचारित की जाती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनकी विरासत आज भी राजनीतिक बहस का विषय बनी हुई है।
उनके विचारों की प्रासंगिकता आज के भारत के विकास के लिए निरंतर विचार-मंथन का विषय बनी हुई है, जिससे राजनीतिक दलों में बहस और चर्चा का सिलसिला जारी रहता है।
यह आगे भी भारत की राजनीति को प्रभावित करता रहेगा।
- एकात्म मानववाद: पश्चिमी विचारधाराओं का विकल्प
- अंत्योदय: गरीबों के उत्थान पर जोर
- राजनीति में उपाध्याय के विचारों का प्रभाव
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Posted on 25 September 2025 | Stay updated with साधनान्यूज़.com for more news.
