गाजा संकट: क्या दुनिया की चुप्पी राजनीतिक विफलता दर्शाती है? Gaza Crisis Highlights Global Failure
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गाजा संकट: क्या दुनिया की चुप्पी राजनीतिक विफलता दर्शाती है? Gaza Crisis Highlights Global Failure
साधनान्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में जारी मानवीय संकट विश्व राजनीति की एक बड़ी विफलता को उजागर करता है।
कई वर्षों पूर्व, गाजा पट्टी में बिताए कुछ दिनों के अनुभव ने मुझे वहां के लोगों की दयालुता और स्नेहशीलता से अवगत कराया था।
उस समय भारत का फिलिस्तीनियों के बीच व्यापक समर्थन था, उन्हें भारत को अपने संघर्ष का एक विश्वसनीय मित्र मानते थे।
इजराइल के निर्माण की पृष्ठभूमि में फिलिस्तीनियों का उनके घरों से विस्थापन एक अविश्वसनीय घटना है, जिसके विरुद्ध कई देशों ने आवाज़ उठाई थी, भारत भी उनमें शामिल था।
किन्तु आज गाजा एक भयावह स्थिति का सामना कर रहा है।
पिछले दो वर्षों में, इजराइल की निरंतर बमबारी ने हजारों घरों को तबाह कर दिया है, स्कूलों, अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और मस्जिदों को निशाना बनाया गया है।
50,000 से अधिक लोगों की जान चली गई है, जिनमें अधिकांश आम नागरिक हैं।
हजारों घायल हुए हैं, और उन्हें उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है क्योंकि अधिकांश चिकित्सा सुविधाएँ नष्ट हो चुकी हैं।
इजराइल की कड़ी नाकेबंदी ने स्थिति को और भी विकट बना दिया है।
इस संकट पर राजनीतिक दलों, विशेष रूप से कांग्रेस और बीजेपी, की प्रतिक्रिया और उनकी विदेश नीति के प्रभाव को समझना महत्वपूर्ण है।
यह घटना वैश्विक राजनीति में नेताओं की भूमिका और चुनावों में इस मुद्दे के उठने की संभावना पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
यह मानवीय त्रासदी वैश्विक समुदाय की निष्क्रियता पर गंभीर प्रश्न उठाती है और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण बहस का विषय बन गई है।
गाजा संकट राजनीति और मानवता के बीच एक महत्वपूर्ण संघर्ष को दर्शाता है।
- गाजा में मानवीय संकट गहरा रहा है।
- इजराइल की बमबारी से 50,000 से अधिक लोग मारे गए।
- विश्व राजनीति की विफलता, नेताओं की भूमिका पर सवाल।
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Posted on 20 September 2025 | Check साधनान्यूज़.com for more coverage.
