वैद्यनाथ धाम: क्या है रावण से जुड़ा रहस्य? ज्योतिर्लिंग का आध्यात्मिक इतिहास Devghar Shiv Temple Sawan Pilgrimage
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वैद्यनाथ धाम: क्या है रावण से जुड़ा रहस्य? ज्योतिर्लिंग का आध्यात्मिक इतिहास Devghar Shiv Temple Sawan Pilgrimage
साधनान्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के देवघर में स्थित वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है।
हर वर्ष सावन मास में यहां लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन हेतु आते हैं, सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा भी एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव है।
यह मंदिर रामायण काल से जुड़ा हुआ है, और इसकी कथा रावण के तीव्र तप और भगवान शिव के प्रति अटूट भक्ति से गहरे रूप से जुड़ी है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण ने हिमालय में कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था।
अपनी भक्ति सिद्ध करने के लिए उसने अपने नौ शिरों को काटकर शिवलिंग पर अर्पित किया।
आखिरी शिर काटने से पहले भगवान शिव ने उसे वरदान मांगने को कहा।
रावण ने शिवलिंग को लंका में स्थापित करने का वरदान माँगा।
भगवान शिव ने उसे शिवलिंग प्रदान किया, लेकिन उस पर एक शर्त रखी गई।
कथा के अनुसार, रावण शिवलिंग को लंका ले जाते समय एक स्थान पर विराम लेता है, जहाँ यह शिवलिंग स्थायी रूप से स्थापित हो जाता है, जो आज वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजनीय है।
यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति और धर्म की गौरवशाली विरासत को भी प्रतिबिंबित करता है।
वैद्यनाथ धाम में शिव पूजा का विशेष महत्व है और यह एक ऐसा स्थल है जहाँ श्रद्धालुओं को अद्भुत शांति और आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव होता है।
इस प्राचीन मंदिर की कथाएं आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।
- रावण की कठोर तपस्या और भगवान शिव से वरदान प्राप्ति
- वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का स्थापन और इससे जुड़ी पौराणिक कथा
- देवघर में स्थित मंदिर का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
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Posted on 16 September 2025 | Stay updated with साधनान्यूज़.com for more news.
