पंजाब की राजनीति: क्या बढ़ रहा है धार्मिक ध्रुवीकरण? राजनीति Punjab Politics Shifting Religious Tensions
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पंजाब की राजनीति: क्या बढ़ रहा है धार्मिक ध्रुवीकरण? राजनीति Punjab Politics Shifting Religious Tensions
साधनान्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब की राजनीतिक स्थिति तेज़ी से बदल रही है, जिसमे धार्मिक और सांप्रदायिक तत्वों का बढ़ता प्रभाव चिंता का विषय है।
1 सितंबर को, प्रधानमंत्री के अफगानिस्तान भूकंप पर ट्वीट के जवाब में, अकाल तख्त और तख्त श्री दमदमा साहिब गुरुद्वारा के पूर्व मुख्य ग्रंथी ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
ज्ञानी हरप्रीत सिंह, जो शिरोमणि अकाली दल के भीतर की दरारों से उत्पन्न राजनीतिक शून्य को भरने की कोशिश कर रहे हैं, सिख राजनीति में एक नया नेतृत्व स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं।
वे खुद को एक ‘नवां’ अकाली दल का प्रमुख मानते हैं, हालांकि वे इसे अलग गुट नहीं मानते, बल्कि सुखबीर सिंह बादल के अकाली दल को अलग हुआ हुआ बताते हैं।
इसके साथ ही, अमृतपाल सिंह का शिरोमणि अकाली दल (वारिस पंजाब दे) सिख राजनीति में तीसरी प्रमुख ताकत के रूप में उभर रहा है।
यह राजनीतिक अस्थिरता खतरनाक ताकतों, विशेष रूप से आईएसआई के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
ज्ञानी हरप्रीत सिंह के ट्वीट्स, जो अक्सर पंजाबी (गुरुमुखी) में होते हैं, वर्तमान में पंजाब में बाढ़ की तबाही को दर्शाते हैं।
नई दिल्ली के प्रति विरोध सिख राजनीति का एक केंद्रीय मुद्दा बना हुआ है, और ज्ञानी जी ने प्रधानमंत्री के ट्वीट को इसी संदर्भ में समझा।
यह घटनाक्रम पंजाब में राजनीतिक अस्थिरता और धार्मिक भावनाओं के राजनीतिकरण को उजागर करता है, जिस पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों को गंभीरता से विचार करना होगा।
चुनावों से पहले इस स्थिति का नेताओं पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
यह स्थिति पंजाब के भविष्य के लिए चिंताजनक है और इस पर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
- पंजाब में सिख राजनीति में तनाव बढ़ रहा है।
- धार्मिक भावनाओं का राजनीतिकरण चिंता का विषय है।
- आईएसआई का संभावित हस्तक्षेप एक बड़ा खतरा है।
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Posted on 11 September 2025 | Stay updated with साधनान्यूज़.com for more news.
