पितृ पक्ष: जानिए पितर देवता और श्राद्ध विधि | धर्म, पूजा, आध्यात्मिक Pitru Paksha Starts September Eighth
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पितृ पक्ष: जानिए पितर देवता और श्राद्ध विधि | धर्म, पूजा, आध्यात्मिक Pitru Paksha Starts September Eighth
साधनान्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, आज 8 सितंबर से पितृ पक्ष आरंभ हो रहा है, जो 21 सितंबर (सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या) तक चलेगा।
यह पितरों को याद करने का पावन अवसर है, जिसमें श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और धूप-दीप से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने की परंपरा है।
पितर देवता हमारे पूर्वजों, घर-परिवार के मृत सदस्यों को कहा जाता है।
पितृ पक्ष में इन सभी का स्मरण करते हुए श्राद्ध कर्म करना चाहिए।
श्रीमद् भगवद्गीता के दसवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि वे पितरों में अर्यमा हैं, जो पितरों के राजा माने जाते हैं और ऋषि कश्यप और अदिति के तीसरे पुत्र हैं।
यमराज, मृत्यु के देवता भी पितरों से जुड़े हैं।
एक मान्यता यह भी है कि ब्रह्मा जी के शरीर से ही सबसे पहले पितर देव उत्पन्न हुए थे।
पितृ पक्ष में अर्यमा देवता की पूजा का विशेष महत्व है।
श्राद्ध कर्म करने का सही समय परिवार के मृत सदस्य की मृत्यु तिथि के अनुसार होता है।
घर पर श्राद्ध करने की विधि सरल है जिसमें पितरों के लिए भोजन, जल, और पूजा सामग्री अर्पित करना शामिल है।
शुद्ध मन से किए गए श्राद्ध कर्म से पितरों को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।
इस पवित्र अवसर पर अपने पितरों को याद करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करें और धार्मिक कर्मों में भागीदारी करें।
यह धार्मिक अनुष्ठान आध्यात्मिक शक्ति और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम को बढ़ावा देता है।
पितृ पक्ष का यह पवित्र समय, पूजा, देवता और धर्म से जुड़े अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।
- पितृ पक्ष: 8 से 21 सितंबर तक
- पितरों का स्मरण, श्राद्ध, तर्पण
- घर पर श्राद्ध करने की सरल विधि
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Posted on 09 September 2025 | Check साधनान्यूज़.com for more coverage.
